फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। शहर में पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की सुविधा के लिए बनाए गए साइकिल ट्रैक और फुटपाथ अब अपने उद्देश्य से भटक चुके हैं। इन पर बढ़ते अतिक्रमण के कारण लोग मजबूरी में सड़क पर चलने को विवश हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब इन सुविधाओं पर लाखों रुपये खर्च किए गए, तो उनका लाभ आम जनता तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को दिल्ली-मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाली चार लेन सड़कों के साथ बनाए गए फुटपाथ और साइकिल ट्रैक आज पूरी तरह अतिक्रमण की चपेट में हैं। कई जगहों पर इन पर वाहनों की पार्किंग की जा रही है, यहां तक कि पार्किंग के नाम पर ठेकेदार द्वारा वसूली भी की जा रही है। इसके अलावा रेहड़ी-पटरी वालों और होटल संचालकों ने भी इन स्थानों पर कब्जा कर लिया है, जिससे पैदल और साइकिल से चलने वाले लोग सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि लघु सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के सामने ही यह अतिक्रमण खुलेआम हो रहा है। रोजाना इसी मार्ग से गुजरने वाले अधिकारी भी इस स्थिति से अनजान नहीं हैं, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। इससे स्पष्ट है कि जिम्मेदार विभागों की ओर से इस समस्या को लेकर गंभीरता की कमी है।
सेक्टर-12 कोर्ट रोड, जिसे लगभग 11.35 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया था, उस पर भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी इस सड़क के दोनों ओर बने फुटपाथ और साइकिल ट्रैक पर लघु सचिवालय और कोर्ट के सामने वाहनों की पार्किंग करवाई जा रही है। हालांकि ठेकेदार को केवल आसपास की पार्किंग का ठेका मिला है, लेकिन वह ट्रैक और फुटपाथ पर भी कब्जा कर वसूली कर रहा है।
इसी मार्ग पर होटल संचालकों और दुकानदारों ने ट्रैक और फुटपाथ पर मेज-कुर्सियां लगाकर अतिक्रमण कर लिया है। पुरानी गाड़ियों की बिक्री करने वालों ने भी इन्हें खड़ा कर रखा है। सेक्टर-12 मार्केट की पार्किंग पर भी इसी तरह कब्जा है, जहां पुरानी कारों का अघोषित बाजार बन चुका है। वहीं झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग भी साइकिल ट्रैक का उपयोग रहने और खाने-पीने के लिए कर रहे हैं।
सेक्टर-15 और 16 को जोड़ने वाली सड़क, जिस पर करीब 13.25 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, वहां भी हालात अलग नहीं हैं। यहां बने साइकिल ट्रैक के बीचों-बीच पेड़, बिजली के खंभे और तार जैसी बाधाएं मौजूद हैं, जो न केवल उपयोग में परेशानी पैदा करती हैं बल्कि दुर्घटना का कारण भी बन सकती हैं। कुल मिलाकर, शहर में विकसित की गई ये सुविधाएं अतिक्रमण और अव्यवस्था के चलते बेकार साबित हो रही हैं। प्रशासन सुस्त रवये से यह समस्या और गंभीर हो रही है।