दिल्ली स्थित रेस क्लब की जमीन पर चला बुलडोजर, केंद्र सरकार ने लिया कब्जा


लुटियंस दिल्ली की बेहद कीमती जमीन पर अब केंद्र सरकार का कब्जा हो गया है. प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब स्थित ऐतिहासिक दिल्ली रेस क्लब की 84 एकड़ की जमीन को सरकार ने अपने नियंत्रण में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है. 84 एकड़ के जमीन के विवाद के मद्देनजर सरकार ने कुछ एकड़ जमीन पर भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में रेस क्लब परिसर में बुलडोजर पहुंचा और पुराने और जर्जर ढांचों को गिराने का काम शुरू कर दिया गया.

कोर्ट से राहत नहीं मिली, दो दिन बाद ही कार्रवाई

सरकार की यह कार्रवाई पटियाला हाउस कोर्ट के उस आदेश के ठीक दो दिन बाद हुई है जिसमें दिल्ली रेस क्लब लिमिटेड को कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया था. क्लब ने एस्टेट ऑफिसर के बेदखली आदेश पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा था कि क्लब को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया गया था लेकिन वह इस मौके का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सका.

रक्षाबंधन पर महिलाओं को नहीं मिले 2500 रुपये! कांग्रेस बोली- ‘वादा भूली BJP’

जैसी है, जहां है के आधार पर प्रशासन ने लिया जमीन का कब्जा

पटियाला हाउस कोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलने के बाद भूमि एवं विकास कार्यालय और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जमीन का औपचारिक ट्रांसफर कराया. यह ट्रांसफर जैसी है जहां है के आधार पर किया गया.  कागजी कार्रवाई पूरी होते ही परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई. पुराने और अपनी उम्र पूरी कर चुके कई ढांचों को बुलडोजर से हटाया जा रहा है.

30 साल से ज्यादा समय से खत्म था लीज

सरकार के मुताबिक रेस क्लब की इस जमीन का लीज दिसंबर 1994 में ही खत्म हो गया था. इसके बाद किसी नए दस्तावेज के जरिए लीज का नवीनीकरण नहीं हुआ. केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट  में दलील दी गयी थी कि लीज खत्म होने के बाद क्लब सरकारी जमीन पर अनधिकृत रूप से काबिज था. यही सरकार की कार्रवाई का सबसे बड़ा आधार बना.

आगे की देखरेख CPWD करेगा

जमीन पर कब्जा लेने के बाद इसके रखरखाव और आगे के विकास की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को दी गई है, यानी अब इस प्राइम लोकेशन की जमीन पर क्लब का पुराना नियंत्रण खत्म होकर सीधे केंद्र सरकार का नियंत्रण हो गया है.

क्लब की मुख्य याचिका अभी अदालत में लंबित

हालांकि मामले की कानूनी लड़ाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. क्लब की मुख्य चुनौती अभी अदालत में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 26 सितंबर को होनी है लेकिन फिलहाल अदालत से अंतरिम संरक्षण नहीं मिलने के कारण सरकार ने इंतजार करने के बजाय जमीन का कब्जा अपने हाथ में ले लिया है.

वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के पास बनी तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों को अपने घर खाली करने और सावदा घेवरा में वैकल्पिक आवास में जाने के लिए छह हफ़्ते का समय दिया.

दिल्ली SIR: कम वोटिंग वाले इलाकों में कम डिजिटाइजेशन



Source link

Prime Haryana
Author: Prime Haryana

Information with Confirmation

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top