लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (लुवास) की पहल पर पांच दिवसीय शिविर का आयोजन
40 महिलाओं को वैज्ञानिक पशुपालन, रोग प्रबंधन और मोबाइल ऐप्स की दी गई जानकारी
फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। जिले के गाँव छांयसा में अनुसूचित जाति की महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित पांच दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण शिविर का सोमवार को समापन हो गया। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के कुलपति डॉ. विनोद कुमार वर्मा के दिशा-निर्देशानुसार, पशु विज्ञान केंद्र पलवल द्वारा इस प्रशिक्षण का आयोजन ‘अनुसूचित जाति उप-योजना’ (एससी-एसपी) के अंतर्गत किया गया।

वैज्ञानिक पद्धतियों से बढ़ेगी पशुधन उत्पादकता
प्रशिक्षण की संयोजिका डॉ. रेखा दहिया ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि डेयरी व्यवसाय में अधिक लाभ कमाने के लिए गाय और भैंसों की उन्नत नस्लों की पहचान होना अनिवार्य है। पांच दिनों तक चले इस शिविर में महिलाओं को संतुलित पशु आहार तैयार करने, स्वच्छ दूध उत्पादन सुनिश्चित करने और पशुओं के रहने के लिए वैज्ञानिक आवास प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी गई।
डॉ. दहिया ने बताया, “अक्सर पशुपालक छोटी-छोटी सावधानियों के अभाव में नुकसान उठा लेते हैं। हमने यहाँ पशुओं को चीचड़, मक्खी और कृमि (पेट के कीड़े) से बचाने के उपाय साझा किए हैं। साथ ही, गाभिन पशु की देखभाल और बदलते मौसम (गर्मी, सर्दी, बरसात) में उनके प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया है।”
विशेषज्ञों ने दी रोगों और टीकाकरण की जानकारी
शिविर के दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों और विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने सत्रों को संबोधित किया। सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र सिंह ने पशुओं के रखरखाव की वैज्ञानिक पद्धतियों पर प्रकाश डाला। महिलाओं को थनैला रोग, मुँह-खुर पका और गलघोंटू जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षणों और उनके समय पर टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। इसके अतिरिक्त, दूध के मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता जांच के तरीके भी सिखाए गए ताकि महिलाएं स्थानीय स्तर पर अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें।
तकनीक से जुड़ाव और प्रोत्साहन
आधुनिक दौर की जरूरतों को देखते हुए भा.कृ.अनु.प.-भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से आए डॉ. मुकेश कुमार और डॉ. शोमेन पाल ने पशुपालन से संबंधित मोबाइल एप्स’ की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से पशुपालक घर बैठे विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं।
निशुल्क खनिज मिश्रण और प्रमाण पत्र वितरण
समापन समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली गाँव छांयसा की 40 अनुसूचित जाति की महिलाओं को विश्वविद्यालय की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही, पशुओं के स्वास्थ्य वर्धन के लिए सभी प्रतिभागियों को निशुल्क खनिज मिश्रण वितरित किया गया। इस अवसर पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी।
