फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूल अब कचरे का हिस्सा बनने के बजाय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बन रहे हैं। विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम फरीदाबाद की संयुक्त पहल के तहत फूलों के अपशिष्ट से धूप, हवन सामग्री और प्राकृतिक गुलाल जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इस मॉडल को देखने और समझने के लिए जीआईजेड इंडिया के 11 सदस्यीय जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने फरीदाबाद स्थित फूल पुनर्चक्रण केंद्र का दौरा किया और पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली।

फाउंडेशन के अनुसार, पिछले सात महीनों में फरीदाबाद के 15 मंदिरों से करीब 20 टन फूलों और पूजन सामग्री के अपशिष्ट को एकत्रित कर उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया गया है। महाशिवरात्रि के अवसर पर शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य धार्मिक स्थलों से निकलने वाले जैविक कचरे का पुनः उपयोग कर प्रदूषण कम करना और उपयोगी उत्पाद तैयार करना है।
फूलों से उत्पाद बनाने की प्रक्रिया देखी
दौरे के दौरान जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने फूलों के कचरे के संग्रहण, छंटाई, सुखाने और पाउडर बनाने की प्रक्रिया का निरीक्षण किया। प्रतिनिधियों को बताया गया कि इन फूलों से धूप, हवन सामग्री और प्राकृतिक गुलाल जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। वहीं, अन्य जैविक अवशेषों का उपयोग खाद बनाने में किया जाता है। प्रतिनिधिमंडल ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
इस मॉडल के जरिए धार्मिक आस्था से जुड़े अपशिष्ट को संसाधन में बदलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की संभावनाएं भी सामने आई हैं।
शहर के सभी मंदिरों को अभियान से जोड़ने की तैयारी
नगर निगम फरीदाबाद के आयुक्त यशेंद्र सिंह ने विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि फूलों के कचरे का उचित प्रबंधन स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने शहर के सभी मंदिरों को इस अभियान से जोड़कर इसका दायरा बढ़ाने की बात कही।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी : एस.एस. बांगा
विक्टोरा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के अध्यक्ष सरदार एस.एस. बांगा ने जर्मन प्रतिनिधिमंडल द्वारा पहल की सराहना किए जाने पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक संस्था या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज, उद्योग, प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
बांगा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव आज गंभीर चुनौतियां हैं। इनसे निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन फूलों के अपशिष्ट के प्रबंधन के अलावा ट्री एम्बुलेंस के माध्यम से पेड़ों की देखभाल, पौधारोपण और हरित क्षेत्रों के विकास जैसे कार्य भी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य पेड़ों का संरक्षण, हरियाली को बढ़ावा देना और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। उद्योग, प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर काम करें तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी रहे मौजूद
फूल पुनर्चक्रण केंद्र और विभिन्न स्थलों के निरीक्षण के दौरान नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर गौरव अंतिल, नगर निगम सलाहकार इंद्रजीत कुलेडिया, कार्यकारी अभियंता मनदीप सिंह, एसबीएस एक्सपर्ट कल्पना मंडल, विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन की वाइस प्रेसिडेंट दमन बांगा और सीएसआर हेड सरोज कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम की यह पहल ‘कचरे से संपदा’ की अवधारणा को बढ़ावा देती है। मंदिरों से निकलने वाले फूलों का पुनर्चक्रण न केवल कचरे के बेहतर प्रबंधन का विकल्प है, बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार का संदेश भी देता है।
