फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। तिगांव थाना क्षेत्र में जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री और जालसाजी को लेकर वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमे की पुलिस जांच में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस की जांच के अनुसार, विवादित दस्तावेजों पर मिले हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान शिकायतकर्ता मदन सिंह के नमूना निशानों से मेल पाए गए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की और आरोपों के प्रमाणित नहीं होने की बात कही।

वहीं, वकीलों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने शिकायतकर्ता मदन सिंह के खिलाफ वकीलों के विरुद्ध कथित रूप से झूठी शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराने के मामले में कार्रवाई की है। गांव बडौली चंदीला निवासी मदन सिंह ने फरवरी 2026 में पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि कुछ वकीलों ने धोखाधड़ी और जालसाजी करते हुए उसके नाम से जमीन की फर्जी रजिस्ट्री और उससे जुड़े दस्तावेज तैयार कराए।
मदन सिंह ने यह भी दावा किया था कि दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और फोटो उसके नहीं हैं। शिकायत के आधार पर तिगांव थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मामले में राजेन्द्र भाटी एडवोकेट, नरेन्द्र शर्मा एडवोकेट, एम.के. गौड़ एडवोकेट सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए थे और जांच पूरी होने से पहले इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
मुकदमा दर्ज होने के बाद 21 मई 2026 को जिला बार एसोसिएशन की ओर से हड़ताल की गई। वकीलों ने कहा था कि पर्याप्त जांच-पड़ताल के बिना उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वकीलों की ओर से पुलिस को दिए गए पक्ष के अनुसार, जमीन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। उनके अनुसार, वर्ष 2007 में अधिवक्ता शशि मिश्रा ने एक महिला से जमीन खरीदने के संबंध में लिखित इकरारनामा किया था।
बाद में जमीन को लेकर विवाद हुआ और शशि मिश्रा की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। वकीलों के अनुसार, बाद में अदालत में सुनवाई के दौरान मदन सिंह और शशि मिश्रा के बीच समझौता हुआ। उनके अनुसार, समझौते के तहत मदन सिंह ने संबंधित जमीन की रजिस्ट्री शशि मिश्रा के पक्ष में करने की बात स्वीकार की। इसके बाद भुगतान हुआ और वर्ष 2013 में मदन सिंह ने शशि मिश्रा के भाई के पक्ष में रजिस्ट्री कर दी।
वकीलों के अनुसार, रजिस्ट्री के समय विक्रेता, खरीदार और दोनों वकीलों ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए थे तथा कंप्यूटर पर फोटो भी लिए गए थे। बाद में रजिस्ट्री में जमीन के विवरण से संबंधित त्रुटि सामने आने पर दोनों पक्ष दोबारा तहसील पहुंचे और दस्तावेज में सुधार की प्रक्रिया पूरी की गई। मामले में वकीलों की हड़ताल के बाद पुलिस कमिश्नर फरीदाबाद की ओर से निष्पक्ष जांच के लिए सहायक पुलिस आयुक्त तिगांव की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई।
एसआईटी ने जांच के दौरान मदन सिंह के नमूना हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए। पुराने अदालती दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, विवादित रजिस्ट्री और अन्य संबंधित दस्तावेज भी जांच के लिए जुटाए गए। विवादित दस्तावेजों को राज्य की फोरेंसिक प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया। फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ की रिपोर्ट के अनुसार, विवादित दस्तावेजों पर मिले अंगूठे के निशानों की तुलना मदन सिंह के नमूना निशानों से की गई और दोनों के बीच मिलान पाया गया।
रिपोर्ट में मिलान के बिंदुओं को दर्शाने वाली तस्वीरें भी शामिल हैं। पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट में कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में प्रमाणित नहीं हुए। जांच अधिकारी ने मामले में संज्ञेय अपराध नहीं पाए जाने की बात कहते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट पेश की और उसे स्वीकार करने का अनुरोध किया। वकीलों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इसके बाद मदन सिंह के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया।
इसमें वकीलों के खिलाफ कथित रूप से झूठी शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराने और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों पर भी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। पुलिस जांच में वकीलों के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए हैं और पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट अदालत में पेश की है।
