फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच धौज स्वास्थ्य केंद्र से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिला की स्वास्थ्य केंद्र के बंद गेट के बाहर ही डिलीवरी हो गई। आरोप है कि उस समय केंद्र पर कोई डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी या अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था।

मजबूरी में परिजनों और ग्रामीण महिलाओं ने ही प्रसव कराया। मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. जयंत आहूजा ने जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. राजेश से जवाब भी मांगा गया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर मामले में हुई कमियों और लापरवाही की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
गर्भवती को लेकर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे परिजन
जानकारी के अनुसार, गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर उसके परिजन उसे धौज स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उस समय स्वास्थ्य केंद्र का गेट बंद था और मौके पर कोई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिला। महिला की हालत बिगड़ने पर परिजनों और वहां मौजूद ग्रामीण महिलाओं ने ही स्थिति संभाली और स्वास्थ्य केंद्र के गेट के बाहर प्रसव कराया।
इस घटना से परिजनों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी है। उनका सवाल है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव संबंधी सेवाएं उपलब्ध हैं तो आपात स्थिति में वहां स्वास्थ्यकर्मी मौजूद क्यों नहीं थे।
शिकायत नहीं, लेकिन विभाग ने शुरू की जांच
फिलहाल इस मामले में परिजनों की ओर से स्वास्थ्य विभाग में औपचारिक शिकायत किए जाने की जानकारी नहीं है। हालांकि मामला स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। सीएमओ ने संबंधित अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के समय केंद्र पर कौन-कौन कर्मचारी तैनात थे और स्वास्थ्य केंद्र का गेट बंद क्यों था।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
धौज स्वास्थ्य केंद्र की घटना ने स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी फरीदाबाद के एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में इसी तरह की लापरवाही का मामला सामने आ चुका है। पिछले दिनों सेक्टर-4 पीएचसी में गर्भवती महिला को परिजन प्रसव के लिए लेकर पहुंचे थे, लेकिन आरोप था कि स्वास्थ्य केंद्र का गेट नहीं खोला गया। परिजन काफी देर तक दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
स्थिति बिगड़ने पर परिजनों को खुद ही प्रसव की व्यवस्था करनी पड़ी। उस मामले में परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत की थी। जांच के बाद सीएमओ कार्यालय की ओर से कार्रवाई भी की गई थी। अनुबंध के तहत सेवाएं दे रहे एक कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। बाद में कर्मचारी यूनियन के हस्तक्षेप और संबंधित कर्मचारी की ओर से माफी मांगने के बाद उसकी सेवाएं बहाल कर दी गई थीं।
स्वास्थ्य केंद्रों की नियमित जांच के आदेश
धौज मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि गर्भवती महिला की डिलीवरी जैसी आपात स्थिति में स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी को स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि जांच में यदि किसी डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी या अन्य स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रभारी से मांगा गया जवाब
धौज स्वास्थ्य केंद्र में गेट के बाहर डिलीवरी के मामले में स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. राजेश को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सीएमओ ने उनसे पूछा है कि घटना के समय केंद्र पर क्या व्यवस्था थी, स्वास्थ्यकर्मी कहां थे और गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सा सहायता क्यों नहीं मिल सकी। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि इस पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
