मोरनी (पंचकूला)। हरियाणा के पहाड़ी क्षेत्र मोरनी के ग्रामीणों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत की खबर सामने आई है। गोबिंदपुर से ठाठर तक प्रस्तावित सड़क निर्माण का रास्ता अब साफ हो गया है। हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए सड़क निर्माण के लिए 3.77 हेक्टेयर वन भूमि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को निश्शुल्क हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

वन भूमि के हस्तांतरण की अनुमति नहीं मिलने के कारण यह परियोजना लंबे समय से अटकी हुई थी। सरकार की मंजूरी के बाद अब गोबिंदपुर से ठाठर तक सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। इस सड़क का निर्माण पूरा होने से मोरनी क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। खास बात यह है कि इस सड़क का इंतजार स्थानीय लोग करीब 75 वर्षों से कर रहे थे।
75 साल से सड़क सुविधा का इंतजार
मोरनी का भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण यहां सड़क और परिवहन सुविधाओं का विशेष महत्व है। क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को आज भी आवागमन के लिए सीमित रास्तों पर निर्भर रहना पड़ता है। गोबिंदपुर से ठाठर के बीच सड़क निर्माण की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। सड़क निर्माण के लिए आवश्यक वन भूमि का मामला लंबे समय से मंजूरी के इंतजार में था। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
अब हरियाणा सरकार की ओर से वन भूमि को पीडब्ल्यूडी के नाम निश्शुल्क हस्तांतरित करने की स्वीकृति दिए जाने के बाद परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है।
पांच किलोमीटर लंबी और 24 फीट चौड़ी होगी सड़क
स्वीकृत परियोजना के तहत गोबिंदपुर से ठाठर तक करीब पांच किलोमीटर लंबी और 24 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाएगा। सड़क की चौड़ाई और लंबाई को देखते हुए इसके बनने के बाद क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम होने की उम्मीद है। नई सड़क का सबसे बड़ा फायदा मोरनी क्षेत्र के उन गांवों को मिलेगा, जो इस मार्ग से जुड़े हुए हैं। सड़क बनने के बाद लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी और आसपास के गांवों के बीच संपर्क भी बेहतर होगा।
इन गांवों को मिलेगा सीधा लाभ
गोबिंदपुर-ठाठर सड़क बनने से बीड़, माधोवाला, धर्मपुर, गोबिंदपुर और ठाठर सहित आसपास के गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इन गांवों के निवासियों के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दैनिक जरूरतों से जुड़ी सुविधाओं तक पहुंच को भी आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ग्रामीणों को अपने जरूरी कामों के लिए बाजार, सरकारी कार्यालयों और अन्य सुविधाओं तक पहुंचने में भी सहूलियत मिल सकती है। वहीं, आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने और अन्य जरूरी सेवाओं की उपलब्धता के लिहाज से भी सड़क का निर्माण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वन भूमि के कारण अटका हुआ था निर्माण
मोरनी क्षेत्र में सड़क निर्माण के दौरान वन भूमि से जुड़े नियम और स्वीकृतियां बड़ी चुनौती रही हैं। गोबिंदपुर से ठाठर सड़क के मामले में भी वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब सरकार द्वारा 3.77 हेक्टेयर वन भूमि पीडब्ल्यूडी को निश्शुल्क हस्तांतरित करने की मंजूरी दिए जाने के बाद इस बाधा को दूर कर दिया गया है। इससे सड़क निर्माण से जुड़ी आगामी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।
पहाड़ी क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति
मोरनी हरियाणा का प्रमुख पहाड़ी क्षेत्र है और पर्यटन की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। ऐसे में क्षेत्र में बेहतर सड़क संपर्क का सीधा असर स्थानीय विकास पर पड़ सकता है। नई सड़क बनने से ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी। सड़क निर्माण से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क होने पर ग्रामीण अपने कृषि और अन्य स्थानीय उत्पादों को आसपास के बाजारों तक अधिक आसानी से पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
ग्रामीणों में खुशी का माहौल
करीब 75 वर्षों से सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे ग्रामीणों के लिए सरकार की यह मंजूरी बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है। लंबे समय से लंबित मांग पर निर्णय होने के बाद स्थानीय लोगों में सड़क निर्माण को लेकर उम्मीद जगी है। अब ग्रामीणों की नजर निर्माण कार्य शुरू होने और सड़क को निर्धारित समय में पूरा किए जाने पर रहेगी। यदि निर्माण प्रक्रिया तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो आने वाले समय में गोबिंदपुर से ठाठर के बीच आवागमन काफी आसान हो सकता है।
लंबे इंतजार के बाद खुला रास्ता
गोबिंदपुर-ठाठर सड़क परियोजना के लिए वन भूमि हस्तांतरण की मंजूरी को मोरनी क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। **3.77 हेक्टेयर वन भूमि के निश्शुल्क हस्तांतरण, पांच किलोमीटर लंबी और 24 फीट चौड़ी सड़क के निर्माण** से कई गांवों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। आजादी के बाद करीब 75 वर्षों से चली आ रही सड़क की मांग अब जमीन पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।
