कर्नाटक BJP के ‘दिमागी नक्सल’ पोस्ट पर भड़की CJP, बोली- ‘यह नरसंहार…’


कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर कर्नाटक बीजेपी के एक पोस्ट पर आलोचना की है. इस पोस्ट में सीजेपी को दिमागी नक्सल कहकर निशाना पर लिया गया था. सीजेपी ने आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता धारी पार्टी ने उन लोगों के खिलाफ हिंसा वाली तस्वीरों का इस्तेमाल किया है, जिन्हें नक्सली करार दिया गया है. साथ ही पार्टी ने चेतावनी दी है कि यह पोस्ट बड़े पैमान पर नरसंहार का खुला आह्वान है. 

सीजेपी ने कहा, क्या हम सच में सत्ताधारी पार्टी को खुलेआम बड़े पैमाने पर नरसंहार का आह्वान करते हुए देख रहे हैं? हम इसे पूरी तरह नजरंदाज नहीं कर सकते. 

कर्नाटक बीजेपी के पोस्ट पर भड़की सीजेपी

सीजेपी ने कर्नाटक बीजेपी की तरफ से केजीएफ चैप्टर 2 के एक सीन वाले मीम का इस्तेमाल करते हुए आलोचना की है. इस सीन में मुख्य किरदार और उसके साथ पहाड़ से अपने दुश्मनों पर गोलीबारी करते हैं. बीजेपी ने इस सीन का इस्तेमाल शूटरों को अपनी अलग अलग राज्य इकाइयों के तौर पर दिखाने के लिए किया. जबकि दुश्मनों को दिमागी नक्सल बताया है. बीजेपी कर्नाटक की तरफ से एक पोस्ट किया है, इसमें लिखा है, कोई सुस्ती नहीं. पूरी ताकत से दिमागी नक्सलियों का मुकाबला. 

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास बोले- वे अपना होश खो बैठे

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने लिखा, सत्ताधारी पार्टी खुलेआम देश के युवाओं को गोली मारकर हत्या करने की धमकी दे रही है. सरासर बुराई. लगता है वे अपना होश खो बैठे हैं.

एक अन्य पोस्ट में दास ने लिखा, उन्हें यह देखकर दुख हुआ कि जिसे वे दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कहते हैं, वह नफरत में डूबी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी एक ऐसी पीढ़ी की बड़े पैमाने पर हत्या का आह्वान कर रही है. यह सरकार से सवाल करती है और बेहतर व्यवस्था की मांग करती है. 

दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को नफरत में डूबा देख दुख होता है: सौरव दास

दास ने कहा कि सच कहूं तो दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी को इतनी ज्यादा नफरत में डूबा हुआ देखकर दुख होता है, कि उन्हें उस पीढ़ी के सामूहिक नरंसहार की बात करने में बुराई लगती है, जो सरकार से सवाल पूछने और अपने लिए बेहतर सिस्टम और उज्जवल भविष्य की मांग करने में विश्वास रखती है. 

दास ने कहा कि यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा हिटलर ने नाजी जर्मनी में याहूदियों के साथ किया था. हम यहां तक कैसे पहुंच गए. हमें यह पोस्टकरना सामान्य कैसे लगा? ये लोग संविधान में विश्वास नहीं करते. वे सच में एक दूसरे के विचारों और राय के प्रति सम्मान और सहनशीलता की भावना में विश्वास नहीं करते. वे सच में यह नहीं मानते कि लोकतंत्र तभी टिकता है, जब चुने हुए लोगों से जवाब मांगा जाए. यह सच में भारत का विचार नहीं है. इसमें हमारे गांधी, और अंबेडकर विश्वास करते थे. यह दुखद है. यह बेहद ही घिनौना है. मुझे उम्मीद है कि हम इस बदसूरती से बाहर निकल पाएंगे, जिसने हमारे खूबसूरत देश को अपने चपेट में ले लिया है. हमें बहुत संघर्ष के बाद आजादी मिली थी. इसलिए हमें ऐसे घटिया लोगों को कभी भी ऐसे पदों पर नहीं रहने देना चाहिए. 



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Author: Prime Haryana

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