JNU में डिप्रिवेशन पॉइंट्स पर विवाद, CUET स्कोर पर कितना असर और किसे फायदा?


JNU Deprivation Points Controversy: जेएनयू की एडमिशन प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले डिप्रिवेशन पॉइंट्स को लेकर विवाद दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है. इस व्यवस्था के तहत पिछड़े जिलों से आने वाले छात्रों को सीयूईटी में मिले अंकों के अलावा आंतरिक अंक दिए जाते हैं. इससे उम्मीदवारों की मेरिट बदल सकती है. एक अभ्यर्थी ने इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए सवाल उठाया है कि सामान सीयूईटी स्कोर होने के बावजूद सिर्फ जिले के आधार पर किसी उम्मीदवार को अतिरिक्त अंक क्यों दिए जाएं. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जेएनयू को फिलहाल डिप्रिवेशन पॉइंट्स के आधार पर एडमिशन जारी रखने की अनुमति दे दी है. हालांकि ऐसे सभी एडमिशन इस मामले में आने वाले अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे.

क्या होते हैं डिप्रिवेशन पॉइंट्स? 

जेएनयू की डिप्रिवेशन पॉइंट्स व्यवस्था के तहत देश के कुछ पिछड़े जिलों से आने वाले छात्रों को अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं. इसका उद्देश्य उन छात्रों को एडमिशन प्रक्रिया में कुछ राहत देना है, जिन्हें सामाजिक, शैक्षिणक या आर्थिक परिस्थितियों के कारण दूसरे छात्रों की तुलना में कम अवसर मिलते हैं. जेएनयू ने इसके लिए  जिलों को दो कैटेगरी में बांटा है. इन्हें Quartile 1 और Quartile 1 कहा जाता है. Q1 सबसे ज्यादा वंचित जिले शामिल है और यहां से आने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा डिप्रिवेशन पॉइंट्स मिलते हैं. वहीं Q2 के जिले को भी अतिरिक्त अंक मिलते हैं, लेकिन Q1 की तुलना में कम. जो जिले इन दोनों कैटेगरी में शामिल नहीं है, वहां के छात्रों को डिप्रिवेशन पॉइंट्स नहीं मिलते हैं..

किन आधार पर तय होते हैं यह पॉइंट्स?  

जेएनयू ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर कुल 313 जिलों को डिप्रिवेशन पॉइंट्स की लिस्ट में शामिल किया है. इनमें 160 जिले Q1 और 153 जिले Q2 में है. जानकारी के अनुसार इस लिस्ट में 2011 के बाद अपडेट नहीं किया गया है. जिलों को इस लिस्ट में शामिल करने के लिए चार प्रमुख संकेतकों को आधार बनाया गया था. इनमें जिले में महिला निरक्षरता प्रतिशत, कृषि कार्य करने वाली आबादी का प्रतिशत, ग्रामीण आबादी का प्रतिशत और ऐसे घरों का प्रतिशत जहां परिसर में शौचालय नहीं है, वह शामिल है. 

सीयूईटी स्कोर पर कितना पड़ता है असर?

डिप्रिवेशन पॉइंट्स के तहत किसी छात्र को अधिकतम 12 अतिरिक्त अंक मिल सकते हैं, लेकिन सीयूईटी के संदर्भ में इनका असर इससे ज्यादा हो सकता है. जेएनयू की व्यवस्था में यह 12 अंक सीयूईटी स्कोर में 36 अतिरिक्त अंकों के बराबर हो सकते हैं. यानी किसी छात्र के सीयूईटी में हासिल अंक को डिप्रिवेशन पॉइंट्स को जोड़ने के बाद उसकी मेरिट पोजिशन बदल सकती है. यही वजह है कि व्यवस्था को लेकर एडमिशन प्रक्रिया में विवाद खड़ा हुआ है. 

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किस राज्य के छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा? 

डिप्रिवेशन पॉइंट्स के लिए लिस्टेड 313 जिलों में सबसे ज्यादा जिले उत्तर प्रदेश के हैं. इसके बाद मध्य प्रदेश और बिहार का स्थान आता है. उत्तर प्रदेश के 52 जिले, मध्य प्रदेश के 43 जिले और बिहार के 36 जिले इसमें शामिल है. यह व्यवस्था जेएनयू के यूजी और पीजी के अलावा  सर्टिफिकेट ऑफ प्रोफिशिएंसी और एडवांस्ड डिप्लोमा ऑफ प्रोफिशिएंसी जैसे प्रोग्राम भी लागू है.

क्यों देता है जेएनयू डिप्रिवेशन पॉइंट्स?

इस व्यवस्था के पीछे जेएनयू का तर्क है कि सभी छात्र एक जैसी परिस्थितियों में से पढ़ाई और प्रतियोगिता की शुरुआत नहीं करते. कुछ क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण, आबादी और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कमजोर होने के कारण वहां के छात्रों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसे में डिप्रिवेशन पॉइंट्स का उद्देश्य एवं छात्रों को एडमिशन में अतिरिक्त अवसर देना है. यह व्यवस्था जेएनयू में 1970 के दशक से चली आ रही है और समय-समय पर इसमें बदलाव किए गए हैं. 

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Author: Prime Haryana

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