फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। गरीब परिवारों के लिए सरकारी योजना के तहत भेजे जाने वाले गेहूं की कालाबाजारी कर उसे जिले से बाहर ले जाने के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। विभाग ने जिले के संदिग्ध राशन डिपुओं की जांच तेज करते हुए बल्लभगढ़ और ओल्ड फरीदाबाद क्षेत्र में कई डिपुओं के स्टॉक की जांच की। जांच के दौरान स्टॉक में कमी मिलने पर संबंधित डिपो होल्डरों के खिलाफ भी पुलिस में मुकदमे दर्ज करवाए गए हैं।

जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक फरीदाबाद कविता सिंह परिहार ने बताया कि गेहूं की कालाबाजारी के मामले के सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर व्यापक जांच शुरू की गई है। इसी क्रम में ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ क्षेत्र के राशन डिपुओं पर छापेमारी कर स्टॉक का मिलान किया गया। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान कुछ डिपो होल्डर अपने डिपो बंद कर मौके से चले गए थे।
ऐसे मामलों में जिला प्रशासन से अनुमति लेकर डिपो के ताले खुलवाए गए और अंदर रखे राशन के स्टॉक की जांच की गई। जांच में स्टॉक कम पाए जाने पर संबंधित डिपो संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए मुकदमे दर्ज करवाए गए हैं। इनमें एक डिपो ओल्ड फरीदाबाद के दयाल नगर और दूसरा बल्लभगढ़ के बाबा नगर क्षेत्र में बताया गया है।
विभाग ने राशन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी करने वाले ट्रांसपोर्ट ठेकेदार के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के अनुसार संबंधित ट्रांसपोर्ट ठेकेदार द्वारा दूसरी बार गड़बड़ी पाए जाने पर उसके खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया गया है। इससे पहले भी ठेकेदार को चेतावनी दी गई थी।
उन्होंने बताया कि विज ट्रांसपोर्ट के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब गुरुग्राम समेत अन्य ट्रांसपोर्टरों से ओपन टेंडर के तहत व्यवस्था को लेकर बातचीत की जा रही है। विभाग वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर आसपास के डिपो होल्डरों को सीधे गोदाम से राशन उठाने की व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है, ताकि गरीबों के राशन की सप्लाई किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो।
वहीं, राशन वितरण में होने वाली एक अन्य बड़ी शिकायत को भी तकनीक के जरिए खत्म करने की तैयारी कर ली गई है। कार्ड धारकों की ओर से अक्सर शिकायत मिलती थी कि डिपो होल्डर पहले पीओएस मशीन पर अंगूठा लगवा लेते थे और बाद में राशन देने की बात कहकर उन्हें राशन नहीं दिया जाता था।
अब इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। राशन वितरण की पीओएस मशीन को इलेक्ट्रॉनिक कांटे से आपस में लिंक कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत कार्ड धारक को राशन तौलकर दिए जाने के बाद ही पीओएस मशीन से पर्ची निकलेगी। यदि राशन का वजन इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर दर्ज नहीं होगा तो मशीन से वितरण की पर्ची जारी नहीं हो सकेगी। जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार यह व्यवस्था बेहद सटीक है और निर्धारित वजन से 50 ग्राम की भी कमी होने पर पर्ची जारी नहीं होगी। यानी अब डिपो होल्डर के लिए कम राशन देना या केवल अंगूठा लगवाकर राशन न देना आसान नहीं होगा।
राशन तौलने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मशीनें भी विभाग की ओर से डिपो होल्डरों को उपलब्ध कराई गई हैं। इससे पहले खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर भी जिले के सभी राशन डिपुओं पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दे चुके हैं। अब स्टॉक की सख्त जांच, कालाबाजारी करने वालों पर मुकदमे, इलेक्ट्रॉनिक कांटे से जुड़ी पीओएस मशीन और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाओं के बाद राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में विभाग ने शिकंजा कस दिया है।
