फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है। एक सितंबर से प्रस्तावित नई प्रॉपर्टी टैक्स पॉलिसी लागू होने के बाद शहरवासियों का टैक्स अब केवल संपत्ति के आकार और उपयोग के आधार पर ही नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्र के कलेक्टर रेट के अनुसार भी तय होगा। ऐसे में एक ही आकार के मकान का प्रॉपर्टी टैक्स अलग कॉलोनियों में अलग हो सकता है। नगर निगम की कराधान शाखा ने नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

कर्मचारी अलग-अलग क्षेत्रों के कलेक्टर रेट के अनुसार संपत्तियों का डाटा अपडेट करने में जुटे हैं। हालांकि सीमित स्टाफ के कारण इतने कम समय में पूरी प्रक्रिया को पूरा करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने से पहले बकाया संपत्ति कर जमा करने के लिए लोगों के पास सीमित समय बचा है।
निगम अधिकारियों के अनुसार, एक सितंबर से नई कर पॉलिसी के तहत टैक्स की गणना की जाएगी।
कलेक्टर रेट तय करेगा टैक्स का अंतर
नई पॉलिसी के तहत अब अलग-अलग क्षेत्रों के कलेक्टर रेट का सीधा असर प्रॉपर्टी टैक्स पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर जवाहर कॉलोनी और पर्वतीय कॉलोनी में यदि किसी व्यक्ति के पास समान आकार के 100 गज के मकान हैं, लेकिन दोनों क्षेत्रों के कलेक्टर रेट अलग हैं, तो दोनों संपत्तियों का टैक्स भी अलग-अलग हो सकता है। इस बदलाव से उन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर अधिक असर पड़ सकता है, जहां जमीन और संपत्तियों के कलेक्टर रेट अपेक्षाकृत ज्यादा हैं।
घर में दुकान या कारोबार करने वालों को देना पड़ सकता है दोगुना टैक्स
नई पॉलिसी का सबसे बड़ा असर मिक्स यूज प्रॉपर्टी पर पड़ने की संभावना है। यानी जिन लोगों ने रिहायशी मकान के किसी हिस्से में दुकान, वर्कशॉप या अन्य व्यावसायिक गतिविधि शुरू कर रखी है, उन्हें दोगुना संपत्ति कर देना पड़ सकता है। नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं, जिनका उपयोग आवास और कारोबार दोनों के लिए किया जा रहा है।
विशेषकर एनआईटी क्षेत्र की कई कॉलोनियों और सेक्टरों में मकानों के भीतर दुकानें और छोटे कारोबार संचालित हो रहे हैं। मौजूदा उदाहरण के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का वार्षिक संपत्ति कर 500 रुपये बनता है तो मिक्स यूज की श्रेणी में आने पर उसे 1,000 रुपये तक टैक्स देना पड़ सकता है।
नक्शे के नियम तोड़ने वालों पर भी असर
एचएसवीपी सेक्टरों में स्वीकृत नक्शे के अनुसार मकान के आगे और पीछे निर्धारित जगह नहीं छोड़ने वाले संपत्ति मालिकों को भी नई पॉलिसी के तहत अधिक टैक्स का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में दोगुना कर लगाए जाने का प्रावधान बताया जा रहा है।
पार्षदों को जानकारी न मिलने पर उठे सवाल
नई कर पॉलिसी को लेकर कई पार्षदों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नगर निगम की कराधान शाखा को पॉलिसी लागू करने से पहले पार्षदों के साथ बैठक करनी चाहिए थी, ताकि वे अपने-अपने वार्डों में लोगों को समय रहते जानकारी दे सकते। वार्ड-40 के पार्षद पवन यादव का कहना है कि कलेक्टर रेट के आधार पर टैक्स वसूली की जानकारी निगम की ओर से पार्षदों को नहीं दी गई।
अगर समय रहते जानकारी साझा की जाती तो पार्षद लोगों को बकाया कर जमा करने के लिए जागरूक कर सकते थे। फरीदाबाद नगर निगम क्षेत्र में कुल 7.80 लाख संपत्तियां दर्ज हैं, जिनमें से 2.34 लाख संपत्तियों का सत्यापन हो चुका है। इनमें 4.54 लाख रिहायशी संपत्तियां, करीब 17 हजार कमर्शियल संपत्तियां, 1.41 लाख खाली प्लॉट, 42 हजार संस्थान, 13 हजार कृषि क्षेत्र की संपत्तियां और करीब एक लाख मिक्स यूज संपत्तियां शामिल हैं।
