दिल्ली में 15 अगस्त पर पतंगबाजी का कहर, 800 से ज्यादा पक्षी घायल


15 अगस्त को दिल्ली का आसमान तिरंगी पतंगों से रंगा था, लेकिन इसी आसमान में उड़ता मांझा सैकड़ों परिंदों के लिए मौत का जाल बन गया. स्वतंत्रता दिवस के दिन राजधानी के अलग-अलग पक्षी अस्पतालों और राहत केंद्रों में 800 से ज्यादा घायल पक्षी पहुंचने का अनुमान है.

इनमें करीब 10 प्रतिशत परिंदे अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण जिंदगी की जंग हार गए. पक्षी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि हर साल 15 अगस्त के शुरू होने से पहले और उसके बाद घायल पक्षियों के मामले अचानक बढ़ने लगते हैं. 

खतरनाक मांझे ने सैंकड़ों बेजुबान पंक्षियों को लिया चपेट में

स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने का उत्साह दिल्ली में हर साल देखने को मिलता है. इस बार भी सुबह से शाम तक कई इलाकों में आसमान पतंगों से भरा रहा, लेकिन पतंगों के साथ इस्तेमाल होने वाले खतरनाक मांझे ने बड़ी संख्या में पक्षियों को अपनी चपेट में ले लिया.

घायल पक्षियों में किसी के पंख कटे थे, तो किसी के गले में मांझा बुरी तरह फंस गया था. कई परिंदे चोट लगने के बाद उड़ान नहीं भर सके और जमीन पर गिर पड़े. स्थानीय लोगों और पक्षी प्रेमियों की मदद से ऐसे पक्षियों को इलाज के लिए अस्पतालों तक पहुंचाया गया.

भारत से रिश्ते सुधार रहा ये मुस्लिम देश, स्वतंत्रता दिवस पर भेजा मैसेज

एक दिन में 800 से ज्यादा पक्षियों का किया गया इलाज 

चांदनी चौक स्थित जैन पक्षी अस्पताल और रोहिणी के सेक्टर-15 स्थित जीयो बर्ड्स हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के आसपास मांझे से घायल पक्षियों के मामले अचानक बढ़ जाते हैं. जीयो बर्ड्स हॉस्पिटल से जुड़े राजेश जैन और एनके जैन के मुताबिक दिल्ली में करीब 10 पक्षी अस्पताल हैं और 15 अगस्त को मांझे की चपेट में आए 800 से अधिक पक्षियों को इलाज के लिए लाए जाने की जानकारी है.

इनमें कई पक्षियों की चोट बेहद गंभीर थी. अनुमान के मुताबिक करीब 10 प्रतिशत पक्षियों को बचाया नहीं जा सका. ज्यादा खून बहने और गहरी चोटों को मौत की प्रमुख वजह बताया गया है.

जैन पक्षी अस्पताल के चिकित्सक डॉ. रामेश्वर यादव के मुताबिक पतंगबाजी के दौरान अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी घायल होते हैं. कबूतर, कौवे, तोते और चील जैसे पक्षियों के मांझे में फंसने के मामले सामने आते हैं. कुछ पक्षी उपचार के बाद ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर चोट वाले कई परिंदों की उड़ने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. ऐसे पक्षियों के लिए मांझे से लगी चोट जिंदगीभर की परेशानी बन सकती है.

15 अगस्त के आसपास कई गुना बढ़ जाता है खतरा

पक्षी अस्पतालों से जुड़े लोगों के अनुसार, मांझे से घायल पक्षियों की संख्या केवल 15 अगस्त तक सीमित नहीं रहती. स्वतंत्रता दिवस से करीब दो दिन पहले और दो दिन बाद तक ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जाती है. इस दौरान आसमान में पतंगों की संख्या बढ़ने के साथ पक्षियों के मांझे में फंसने की आशंका भी बढ़ जाती है. नीचे कटकर गिरा मांझा भी कम खतरनाक नहीं होता, क्योंकि पेड़ों और बिजली के तारों पर अटकने के बाद यह लंबे समय तक पक्षियों के लिए खतरा बना रहता है.

प्रतिबंध के बावजूद खतरनाक मांझे पर रोक नहीं

सिंथेटिक और कांच लगे मांझे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है. इसके बावजूद बाजार में इसकी उपलब्धता और इस्तेमाल को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं. पतंग उड़ाने के दौरान या कटने के बाद मांझा जब पेड़ों या दूसरी जगहों पर उलझ जाता है, तो उसमें फंसने से पक्षियों के पंख और गले गंभीर रूप से कट सकते हैं. पक्षी प्रेमियों का कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी. प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर निगरानी के साथ लोगों को भी इसके खतरों को समझना होगा.

पक्षी प्रेमियों की अपील   

पर्यावरणविदों और पक्षी संरक्षण से जुड़े लोगों ने लोगों से पतंग उड़ाने के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है. उनका कहना है कि प्रतिबंधित मांझे की जगह साधारण सूती धागे का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. वहीं, सुबह और शाम के समय भी पतंगबाजी से परहेज की जरूरत है, क्योंकि इन घंटों में पक्षियों की आवाजाही अधिक रहती है.

स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने की परंपरा दिल्ली की खुशियों का हिस्सा है, लेकिन इस मौके पर खतरनाक प्रतिबंधित मांझे का  इस्तेमाल होने से जश्न की खुशी की कीमत बेजुबान परिंदों को अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ती है. इसलिए सुरक्षित मांझे और सावधानी के साथ पतंगबाजी का आनंद लें, ताकि यह ऊपर आसमान में उड़ने वाले परिंदों के लिए खतरा न बनें साथ ही नीचे इंसानों के लिए भी सुरक्षित रहे.

ईरान ने भारत को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने क्या कहा?



Source link

Prime Haryana
Author: Prime Haryana

Information with Confirmation

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top