फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। अधिवक्ता कुणाल कांत शर्मा से जुड़े घटनाक्रम को लेकर जिला बार एसोसिएशन, फरीदाबाद की ओर से शुरू की गई न्यायिक कार्य से विरत रहने की हड़ताल गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रही। अधिवक्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत के बावजूद मामले को लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने अदालतों में न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी।

जिला बार एसोसिएशन के प्रधान राजेश बैंसला एवं महासचिव टीका डागर के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने बार परिसर में बैठक कर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की। इस दौरान अधिवक्ताओं में काफी आक्रोश देखने को मिला। पूर्व महासचिव एडवोकेट नरेंद्र शर्मा ने बताया कि अधिवक्ताओं का मानना है कि यह मामला केवल एक अधिवक्ता से जुड़ा व्यक्तिगत विषय नहीं है, बल्कि अधिवक्ताओं की गरिमा, सम्मान और बार की संस्थागत प्रतिष्ठा से संबंधित है।
हड़ताल समाप्त कराने के प्रयासों के तहत पुलिस अधिकारियों की ओर से भी बार नेतृत्व से बातचीत की गई। पूर्व महासचिव एडवोकेट नरेंद्र शर्मा ने बताया कि डीसीपी ट्रैफिक आईएस जयवीर राठी, एसीपी सराय संदीप मोर और एसीपी सेंट्रल राजीव कुमार ने बार पदाधिकारियों से बातचीत कर हड़ताल समाप्त करने का अनुरोध किया। अधिकारियों की ओर से मामले को लेकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच किसी अंतिम सहमति पर बात नहीं बन सकी।
बार प्रधान राजेश बैंसला और महासचिव टीका डागर ने स्पष्ट किया कि हड़ताल और आगे की कार्रवाई को लेकर कोई भी निर्णय बार के सामूहिक फैसले के आधार पर ही लिया जाएगा। बार नेतृत्व ने अधिवक्ताओं की भावनाओं और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति सामूहिक रूप से तय करने की बात कही है।
तीसरे दिन भी न्यायिक कार्य से अधिवक्ताओं के विरत रहने के कारण अदालत परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में न्यायिक गतिविधियां प्रभावित रहीं। बड़ी संख्या में अधिवक्ता बार परिसर में मौजूद रहे और मामले को लेकर आपस में विचार-विमर्श करते रहे। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध तब तक जारी रह सकता है, जब तक मामले में उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप समाधान नहीं निकलता।
इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता जे.पी. आधाना, पवन पराशर, ओम दत्त शर्मा, जे.पी. भाटी, राजेश भाटी, प्रेम दत्त भारद्वाज, अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी, कुणाल कांत शर्मा, बिजेंद्र गुप्ता सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
बार एसोसिएशन और पुलिस प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद अब सभी की नजरें बार की अगली सामूहिक बैठक और उसमें लिए जाने वाले निर्णय पर टिकी हैं। यदि आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो हड़ताल समाप्त होने की संभावना है, जबकि सहमति नहीं बनने की स्थिति में अधिवक्ताओं की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जा सकता है।
