फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। सरकारी गेहूं की कथित हेराफेरी के मामले में फरीदाबाद पुलिस ने परिवहन ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बीपीटीपी थाना पुलिस ने विज रोड लाइंस के ट्रांसपोर्ट ठेकेदार के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मामला 31 जुलाई का बताया गया है, जबकि एफआईआर 8 अगस्त को दर्ज की गई।

पुलिस को मामले की शिकायत खाद्य आपूर्ति विभाग के उपनिरीक्षक अखिल जैन ने बताया की 31 जुलाई को हरियाणा वेयरहाउस कॉरपोरेशन के आरपीएस चौक, खेड़ी गांव, सेक्टर-88 स्थित गोदाम से तौल के बाद जिले के अलग-अलग राशन डिपो पर वितरण के लिए भेजा गया था। दोनों ट्रक जिन में कुल 766 कट्टे गेहूं लदा हुआ था। दोनों वाहनों को निर्धारित राशन डिपो तक ले जाने के बजाय किसी अन्य स्थान पर ले जाया गया और सरकारी गेहूं की कथित हेराफेरी की गई।
एफआईआर के अनुसार विभाग को पाखल टोल प्लाजा से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज में दोनों ट्रकों को 31 जुलाई की रात करीब 11:23 बजे टोल प्लाजा पार करते हुए देखा गया। इसके बाद विभागीय जांच के दौरान कुछ राशन डिपो धारकों से भी जानकारी ली गई। शिकायत के मुताबिक, कुछ डिपो धारकों ने बताया कि उन्हें 31 जुलाई से पहले ही राशन प्राप्त हो चुका था।
यहीं से मामले में एक और गंभीर सवाल खड़ा होता है। यदि संबंधित राशन डिपुओं पर पहले ही गेहूं पहुंच चुका था, तो उसके बाद उन्हीं डिपुओं के नाम पर दोबारा गेहूं जारी किए जाने का आधार क्या था? विभागीय रिकॉर्ड में इन डिपुओं के लिए दोबारा गेहूं की मांग, आवंटन और उठान किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुआ, इसकी भी जांच जरूरी है। ऐसे में विभागीय स्तर पर किसी कर्मचारी या अधिकारी की संभावित मिलीभगत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
कहीं विभागीय स्तर पर तो नहीं हुई मिलीभगत?
मामले की जांच केवल परिवहन ठेकेदार तक सीमित रखने के बजाय विभागीय रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल किए जाने की जरूरत है। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि किसी डिपो पर पहले से गेहूं पहुंच चुका था और उसके बावजूद उसी डिपो के नाम पर दोबारा सरकारी गेहूं जारी किया गया, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि दोबारा आवंटन या उठान की अनुमति किस स्तर पर दी गई और रिकॉर्ड में इसे कैसे दर्ज किया गया।
पेनड्राइव में सौंपी गई सीसीटीवी फुटेज
शिकायत के साथ पाखल टोल प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज वाली पेनड्राइव भी पुलिस को दी गई है। पुलिस के लिए यह फुटेज यह पता लगाने में महत्वपूर्ण हो है कि दोनों ट्रक किस मार्ग से गए और उनकी वास्तविक आवाजाही क्या रही। इसके साथ ही पुलिस राशन डिपो के स्टॉक रजिस्टर, ई-पॉस रिकॉर्ड, गेहूं के आवंटन और उठान संबंधी दस्तावेज, ट्रांसपोर्ट चालान, वेयरहाउस रिकॉर्ड तथा जीपीएस/वाहन मूवमेंट की भी जांच कर रही है।
