नई दिल्ली (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो): डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए इंडिया) ने केंद्र सरकार के 24 घंटे ओपीडी (OPD) प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखा है और इस योजना को अव्यावहारिक व मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया है। डीएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अमित व्यास और महासचिव डॉ शुभ प्रताप सोलंकी ने कहा कि यह प्रस्ताव जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है।

डेमोक्रेटिक मेडिकल एसोसिएशन का कहना है की सरकारी अस्पताल पहले से ही स्टाफ की कमी, सीमित संसाधनों और भारी मरीज भार से जूझ रहे हैं, ऐसे में 24×7 ओपीडी लागू करना सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। डीएमए ने बताया कि सेंट्रल रेजिडेंसी स्कीम 1992 के तहत डॉक्टरों के लिए 48 घंटे साप्ताहिक कार्य सीमा तय है, लेकिन वास्तविकता में रेजिडेंट डॉक्टर 80 से 100 घंटे तक काम कर रहे हैं।
ऐसे हालात में 24 घंटे ओपीडी लागू करना सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से समझौता होगा। संगठन ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रेजिडेंट डॉक्टर संघ के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि बिना बड़े स्तर पर भर्ती और तीन-शिफ्ट व्यवस्था के यह योजना लागू करना संभव नहीं है। उनका कहना है कि केवल ओपीडी का समय बढ़ाने से मरीजों की भीड़ कम नहीं होगी, बल्कि अस्पतालों पर दबाव और बढ़ेगा।
डीएमए के अनुसार नींद की कमी, बढ़ता कार्यभार और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था मिलकर चिकित्सा त्रुटियों का खतरा बढ़ा रहे हैं, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। संगठन ने मांग की है कि 24 घंटे ओपीडी प्रस्ताव को तुरंत वापस लिया जाए, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और रेफरल सिस्टम को मजबूत किया जाए, रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की जाए और ड्यूटी आवर्स नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
डीएमए ने चेतावनी दी है कि यदि जमीनी समस्याओं को नजरअंदाज कर ऐसे फैसले लागू किए गए, तो इसका खामियाजा मरीजों और डॉक्टरों दोनों को भुगतना पड़ेगा।