ग्रेटर फरीदाबाद: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने बेचीं विवादित जमीन, प्लाट धारक लगा रहे कोर्ट के चक्कर

फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। ग्रेटर फरीदाबाद में एचएसवीपी की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिन सेक्टरों में लोगों को प्लॉट बेच दिए गए, वहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। सड़क, पानी, बिजली और सीवर जैसी जरूरी व्यवस्थाएं अधूरी हैं, जबकि दूसरी ओर कई जगह जमीन पर विवाद और अतिक्रमण ने हालात और जटिल बना दिए हैं। सबसे गंभीर स्थिति सेक्टर-80 की सामने आई है, जहां कोर्ट में विवादित जमीन पर ही प्लॉट बेच दिए गए।

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इसका नतीजा यह है कि प्लॉट खरीदने वाले अब अपने ही हक के लिए हाई कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सैकड़ों लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। सेवा का अधिकार आयोग भी इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए अधिकारियों पर जुर्माना लगा चुका है और कई मामलों में जवाब तलब किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में खास सुधार नजर नहीं आ रहा।

ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-76, 77, 78, 80, 81, 83 और 84 में बड़े स्तर पर प्लॉटिंग की गई थी। लोगों से लाखों रुपये लेने के बावजूद इन इलाकों में विकास कार्य अधूरे पड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना ही प्लॉट धारकों को कब्जा ऑफर कर दिया गया, जिससे लोग दुविधा में हैं कि बिना बुनियादी ढांचे के वे निर्माण कैसे शुरू करें। सेवा का अधिकार आयोग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है।

कई मामलों में अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया है और यह स्पष्ट किया गया है कि विकास कार्यों के बिना प्लॉटिंग करना गंभीर लापरवाही है। आयोग ने संबंधित एस्टेट ऑफिसर और ई-नीलामी प्रक्रिया की भी जांच के निर्देश दिए हैं। सेक्टर-80 का मामला सबसे ज्यादा विवादित है। यहां की जमीन पर पहले से कोर्ट केस लंबित होने के बावजूद प्राधिकरण ने प्लॉट बेच दिए।

ई-नीलामी के जरिए प्लॉट लेने वाले कई खरीदारों को बाद में पता चला कि जमीन पर किसानों का कब्जा है और मामला अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में लोग अपने प्लॉट पर कब्जा पाने के लिए हाई कोर्ट की शरण ले चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। भावना गुप्ता और अमनदीप जैसे कई खरीदार पिछले तीन वर्षों से अपने ही प्लॉट का इंतजार कर रहे हैं।

दूसरे सेक्टरों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। सेक्टर-84 में प्लॉट खरीदने वाले केशव शर्मा बताते हैं कि ई-नीलामी में प्लॉट लेने के बाद जब उन्होंने मौके पर जाकर देखा तो वहां कोई मूलभूत सुविधा नहीं थी, जिसके कारण वे अब तक मकान नहीं बना पाए हैं। इसी तरह सेक्टर-77 के मनोज का कहना है कि पूरी रकम जमा करने के बावजूद उनके प्लॉट के सामने सड़क तक नहीं बनी है, जिससे वे आज भी किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं।

वहीं सेक्टर-80 में जमीन को लेकर विवाद और गहरा गया है। बड़ौली और प्रहलादपुर गांव के ग्रामीण अपनी जमीन वापस लेने की मांग को लेकर पिछले साढ़े तीन महीनों से धरने पर बैठे हैं। घर बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक बीरपाल गुर्जर का कहना है कि वे किसी भी हालत में जमीन का कब्जा नहीं देंगे और आंदोलन जारी रहेगा। इस पूरे विवाद को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है, जिससे स्थिति और पेचीदा हो गई है।

इस बीच हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के संपदा अधिकारी नवीन कुमार ने माना है कि सेक्टर-80 की जमीन पर कोर्ट केस चल रहा है। उनका कहना है कि प्राधिकरण हाई कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेगा और अतिक्रमण हटाकर लोगों को कब्जा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही अन्य सेक्टरों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम जारी होने का दावा भी किया गया है।

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Author: Prime Haryana

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