फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। विश्वप्रसिद्ध 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में शनिवार का दिन अफरा-तफरी और दहशत भरा रहा। मेले के मनोरंजन क्षेत्र में एक बड़ा झूला अचानक टूटकर गिर गया, जिसमें करीब 7-8 लोग घायल हो गए। इसी दिन एक अन्य घटना में गेट नंबर-2 का सजावटी हिस्सा गिरने से भी एक व्यक्ति चोटिल हुआ। इन दोहरे हादसों ने मेले में सुरक्षा प्रबंधों और ‘स्ट्रक्चरल ऑडिट’ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मनोरंजन क्षेत्र में मची चीख-पुकार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार को भारी भीड़ के बीच मनोरंजन क्षेत्र में एक झूला अपनी गति में था, तभी तकनीकी खराबी के कारण उसका एक हिस्सा टूट गया। हादसे के वक्त झूले पर करीब 15 लोग सवार थे। झूला गिरते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। सूत्रों के मुताबिक, घायलों में एक पुलिस अधिकारी भी शामिल है। घटना के तुरंत बाद मेला प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर सभी झूलों को बंद करवा दिया है।
गेट गिरने से भी हुआ हादसा
झूला हादसे के कुछ ही समय बाद, मेले के प्रवेश द्वार संख्या-2 पर लगा एक भारी सजावटी पल्ला अचानक गिर गया। इसकी चपेट में आने से एक पर्यटक घायल हो गया। जिला उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और राहत कार्यों की निगरानी की।फिलहाल हमारी प्राथमिकता घायलों को उपचार दिलाना है। सुरक्षा में चूक की जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
सुरक्षा ऑडिट पर उठे सवाल
यह पहली बार नहीं है जब सूरजकुंड मेले में सुरक्षा को लेकर लापरवाही सामने आई है। इससे पहले साल 2019 में भी झूला टूटने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े स्तर के आयोजनों में झूलों का दैनिक तकनीकी निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। सजावटी गेटों और अस्थायी ढांचों का लोड टेस्ट जरूरी है। भीड़ के दबाव को संभालने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग की कमी दिखी। 39वां सूरजकुंड मेला अपनी लोक कला और सांस्कृतिक विविधता के लिए चर्चा में था, लेकिन इन हादसों ने पर्यटकों के मन में डर पैदा कर दिया है। प्रशासन ने दावा किया है कि चिकित्सा और फायर टीमें मुस्तैद हैं, लेकिन शनिवार की घटनाओं ने ‘इवेंट सेफ्टी मैनेजमेंट’ की पोल खोल कर रख दी है।