39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला: सूफी, बॉलीवुड और कॉमेडी के तड़के से सजेगी सांस्कृतिक महफिल

फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। अरावली की वादियाें में लगने वाले 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की महफिल सजेगी। लोककला, सूफी, बॉलीवुड और कॉमेडी तड़का लगेगा। इसे लेकर पर्यटन निगम की ओर से बुधवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की लिस्ट जारी कर दी गई है। आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम पर आधारित महोत्सव में देश-विदेश के शिल्पकारों के साथ-साथ नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां पर्यटकों को भारतीय लोक परंपराओं और आधुनिक संगीत से रूबरू कराएंगी।

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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत 31 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सारंगी वादक एवं विश्व संगीत कलाकार कमल साबरी की प्रस्तुति से होगी। एक फरवरी को पद्मश्री से सम्मानित हरियाणा के प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं गायक महाबीर गुड्डू हरियाणवी लोक गीतों से माहौल को रंगीन बनाएंगे। वहीं दो फरवरी को बॉलीवुड एवं लोक गायक हेमंत बृजवासी अपनी मधुर आवाज से दर्शकों को झूमने पर मजबूर करेंगे।

तीन फरवरी को विशेष सांस्कृतिक संध्या आयोजित की जाएगी, जबकि चार फरवरी को ओडिशा की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुस्मिता दास प्रस्तुति देंगी। पांच फरवरी को इंडियन आइडल-10 के विजेता सलमान अली मंच संभालेंगे और अपनी गायकी से युवाओं में खास उत्साह भरेंगे। छह फरवरी को दिल्ली का लोकप्रिय पॉप-सूफी म्यूजिक बैंड ‘स्वरिज्म’ अपनी फ्यूजन धुनों से समां बांधेगा।

सात फरवरी को प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन एवं लेखक अमित टंडन दर्शकों को हंसी से लोटपोट करेंगे। आठ फरवरी को पंजाबी संगीत के दिग्गज गायक एवं अभिनेता गुरदास मान प्रस्तुति देंगे। नौ फरवरी को पद्मश्री से सम्मानित गायक कैलाश खेर अपनी सूफियाना गायकी से दर्शकों को भावविभोर करेंगे। इसके अलावा 10 फरवरी को हास्य-व्यंग्य कवि सरदार मनजीत सिंह, 11 फरवरी को राजस्थान का प्रसिद्ध लोक समूह ‘डेजर्ट सिम्फनी’ और 12 फरवरी को पंजाबी गायक अशोक मस्ती अपनी प्रस्तुतियों से महोत्सव को और यादगार बनाएंगे।

हर साल मेला पहुंचते हैं लाखों पर्यटक

पर्यटन निगम अधिकारियों ने बताया कि सूरजकुंड शिल्प महोत्सव केवल हस्तशिल्प और खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, लोक कला और संगीत परंपराओं का जीवंत मंच भी है। हर वर्ष लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं और इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में सैलानियों के आने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए कलाकारों और शिल्पकारों को वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को भी मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश को लोक संस्कृति से सजा सूरजकुंड मेला परिसर

सूरजकुंड मेला परिसर को उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति की झलक से सजाया जा रहा है। प्रवेश द्वार से लेकर पंडाल तक पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और रंग-बिरंगी सजावट आकर्षण का केंद्र बनेगे हैं। मेला प्राधिकरण का फोकस ऐसा माहौल बनाने पर है, जिससे पर्यटकों को यूपी की सांस्कृतिक विरासत का अनुभव हो सके।

मेला परिसर की सजावट पर किया जा रहा फोकस

मेला परिसर में यूपी की लोक परंपराओं को उभारने के लिए खास थीम सजावट की जा रही है। दीवारों पर लोक चित्रकारी, मंचों पर पारंपरिक आकृतियां और रोशनी की विशेष व्यवस्था की गई है। इससे मेला परिसर जीवंत बन रहा है और दर्शकों में उत्साह देखने को मिल रहा है।

मेला नोडल अधिकारी ने बताया :

मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। मेले में आने वाले कलाकारों की सूची तैयार की गई है। हर दिन पर्यटकों को नए कलाकार रोमंचित करेंगे। -हरविंदर यादव, नोडल अधिकारी, सूरजकुंड मेला

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Author: Prime Haryana

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