सरकार की सख्ती से घटे चीनी के दाम, इंपोर्ट को भी मिली मंजूरी


चीनी के ज्यादा दामों पर सरकार की सख्ती का असर अब बाजार में दिखने लगा है. 10 लाख टन कच्ची चीनी के सामान को मंजूरी और थोक खरीदारों पर स्टॉक की लिमिट लगाने के बाद कीमतें नीचे आने लगी हैं. कोल्हापुर में महज 4 दिनों में चीनी के दाम करीब 12.59% गिर गए हैं.

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड के स्पॉट मार्केट के आंकड़ों के हिसाब से, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मीडियम ग्रेड चीनी की कीमत 21 अगस्त को करीब 6,350 रुपये प्रति क्विंटल थी. 25 अगस्त तक ये कम होकर करीब 5,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गई. यानी कुछ ही दिनों में कीमत में करीब 12.59% की गिरावट आई है.

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मिलों पर ज्यादा हो सकता है दबाव

 उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इसी दौरान चीनी का कीमत करीब 5,800 रुपये प्रति क्विंटल पर बना रहा. इससे साफ है कि सरकार के कदमों का फिलहाल बाजार पर असर दिख रहा है. लेकिन आगे चीनी के दाम कितने नीचे जाते हैं और कितने समय तक कम रहते हैं, इस पर नजर रहेगी.

कुछ बिजनेस करने वालों का कहना है कि अगर चीनी की कीमत 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे चली जाती है और ये हालात अगले सीजन तक बनी रहती है, तो चीनी मिलों पर दबाव ज्यादा हो सकता है. अगला पेराई सीजन अक्टूबर के आखिर में शुरू होने की उम्मीद है. फिलहाल चीनी बनाने की खर्च करीब 4,200-4,300 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही है.

इस बीच, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 3.5 लाख टन चीनी को घरेलू बाजार में भेजने की मंजूरी दी गई है. ये चीनी पहले विदेश भेजी जानी थी. इससे जुड़े लोगों के हिसाब से, ये स्टॉक एक हफ्ते के अंदर घरेलू खरीदारों के लिए मिल सकता है. इतनी चीनी देश की करीब 5 दिन की कुल चीनी मांग को पूरा करने के लिए काफी मानी जा रही है.

त्योहारी सीजन में ज्यादा हुई मांग

इससे आने वाले दिनों में घरेलू बाजार को राहत मिल सकती है. लेकिन, बाद में ब्राजील से चीनी की खेप आने पर चीनी की जरूरत बनी रह सकती है.

भारत में अगस्त के आखिर से जनवरी तक त्यौहारों का सीजन रहता है. इस दौरान मिठाइयों और प्रोसेस्ड फूड की मांग ज्यादा होने से चीनी की खपत भी ज्यादा हो जाती है. अनुमान है कि अक्टूबर के लास्ट तक भारत 3 लाख से 6 लाख टन तक चीनी बाहर से मांगा सकता है. ये सरकार की मंजूर 10 लाख टन की सीमा से कम है, क्योंकि घरेलू कीमतें घटने से मिलों और रिफाइनरियों के लिए ज्यादा बाहर से चीनी मांगना अब कम फायदेमंद  हो गया है.

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Prime Haryana
Author: Prime Haryana

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