दिल्ली में मास्टर प्लान 2047 के जरिए भविष्य का खाका तैयार करने की कवायद के बीच कांग्रेस ने खुद को इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने की बात कही है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू से मांग की है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से प्रस्तावित आउटरीच कार्यक्रम में कांग्रेस को भी शामिल किया जाए. उनका कहना है कि राजधानी के भविष्य की विकास रूपरेखा तैयार करने में कांग्रेस के लंबे शासन और दिल्ली के नियोजित विकास के अनुभव का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
डीडीए 20 हितधारकों के साथ करेगा बैठक
देवेंद्र यादव ने कहा कि उपराज्यपाल के निर्देश पर डीडीए मास्टर प्लान 2047 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए दिल्ली के सांसदों, विधायकों, सरकारी एजेंसियों, उद्योग इकाइयों और आरडब्ल्यूए समेत करीब 20 हितधारकों के साथ बैठकें करने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली के भविष्य और विकास से जुड़े इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विभिन्न पक्षों को शामिल किया जा रहा है, तो कांग्रेस को इससे बाहर क्यों रखा गया है. उन्होंने उपराज्यपाल से डीडीए को कांग्रेस को भी इस आउटरीच कार्यक्रम में शामिल करने का निर्देश देने की अपील की है.
‘कांग्रेस ने 15 साल में दिल्ली को विश्वस्तरीय राजधानी बनाया’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस की 15 साल की सरकार के दौरान राजधानी के योजनाबद्ध विकास पर काम हुआ और शहर को विश्वस्तरीय राजधानी के तौर पर विकसित करने का प्रयास किया गया. उनके मुताबिक, कांग्रेस ने अपने शासनकाल में यह दिखाया कि दिल्ली में बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए योजनाबद्ध तरीके से विकास कैसे किया जा सकता है. देवेंद्र यादव का कहना है कि मास्टर प्लान 2047 को लागू करने की प्रक्रिया में कांग्रेस के इस अनुभव का लाभ दिल्ली के भविष्य के विकास के लिए लिया जाना चाहिए.
बीजेपी पर लगाया ओछी राजनीति का आरोप
यादव ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान 2047 के आउटरीच कार्यक्रम में कांग्रेस को शामिल नहीं करना बीजेपी की ओछी राजनीति को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी वास्तव में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करती है, तो दिल्ली के विकास से जुड़े इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कांग्रेस को भी 20 हितधारकों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दिल्ली में नागरिक सुविधाओं को लोगों तक पहुंचाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वच्छ एवं हरित राजधानी बनाने की दिशा में काम किया गया था.
किसे बताया मास्टर प्लान में देरी की वजह?
देवेंद्र यादव ने आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दिल्ली में 12 वर्षों से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद आम आदमी पार्टी की सरकार केंद्र की बीजेपी सरकार और उपराज्यपाल के साथ लगातार टकराव में उलझी रही. उनके अनुसार, इसी टकराव के कारण दिल्ली के व्यापक मास्टर प्लान को तैयार करने और लागू करने की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हो सका.
उन्होंने कहा कि शहरी भूमि योजना और शीर्ष योजना निकाय डीडीए केंद्र सरकार तथा उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण दिल्ली सरकार और डीडीए के बीच लगातार मतभेद रहे. यादव के मुताबिक, इस आपसी खींचतान का असर राजधानी के विकास और नागरिक सुविधाओं पर पड़ा.
बारिश, पानी और प्रदूषण को लेकर भी सरकार पर हमला
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि दिल्ली में बुनियादी नागरिक सुविधाओं की स्थिति खराब हुई है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने सड़कों पर बारिश के दौरान जलभराव, शुद्ध पानी की समस्या और वायु प्रदूषण का मुद्दा उठाया. उन्होंने टूटी सड़कों और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई. यादव के मुताबिक, दिल्ली में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का असर शहर के बुनियादी ढांचे पर पड़ा है.
‘कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी बैठक में बुलाया जाए’
देवेंद्र यादव ने कहा कि भले ही मौजूदा समय में दिल्ली से कांग्रेस का कोई विधायक या सांसद नहीं है, लेकिन डीडीए को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों को मास्टर प्लान 2047 से जुड़ी 20 हितधारकों की बैठकों में शामिल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि दिल्ली और केंद्र में शासन का अनुभव रखने वाले कांग्रेस नेताओं के सुझाव राजधानी के विकास की योजना तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं और इससे दिल्ली के लोगों के हितों को भी बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकेगा.
सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर आगे बढ़ने की अपील
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने डीडीए और बीजेपी से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मास्टर प्लान 2047 को लागू करने की प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों को शामिल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि दिल्ली के भविष्य और विकास से जुड़े इतने बड़े प्लान को प्रभावी बनाने के लिए व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि राजधानी के विकास की रूपरेखा तैयार करने में सभी पक्षों के अनुभव और सुझावों को जगह मिलनी चाहिए, ताकि मास्टर प्लान 2047 को दिल्ली के लोगों की जरूरतों के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके.
