सहकार भारती स्थापना दिवस: सहकारिता को जनआंदोलन बनाने का संकल्प

पलवल, (योगेंद चौहान)। संघ कार्यालय में आयोजित सहकार भारती द्वारा स्थापना दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हनुमान अग्रवाल अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सहकार भारती ने कहा कि आज का दिन स्थापना दिवस के साथ समाज को सहकार बनाने का संकल्प दिवस है। हमें अपनी सामाजिक जीवन परम्परा में संस्कार, सहयोग और सहकार को अंगीकृत करना है।

उन्होंने बताया कि 11 जनवरी का दिन भारतीय सहकारिता आंदोलन के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी पावन तिथि को सहकार भारती की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य सहकारिता को राष्ट्रहित में एक सशक्त जनआंदोलन के रूप में विकसित करना रहा है। 11 जनवरी 2026 को मनाया जाने वाला स्थापना दिवस न केवल संगठन की उपलब्धियों का स्मरण कराता है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी एक महत्वपूर्ण अवसर है।

सहकार भारती की स्थापना ऐसे समय में हुई, जब सहकारिता क्षेत्र अपने मूल उद्देश्यों से भटक रहा था। संगठन ने स्पष्ट किया कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि संस्कार, स्वावलंबन और सामाजिक समरसता का सशक्त माध्यम है। “लाभ नहीं, सेवा” के मूल मंत्र के साथ सहकार भारती ने सहकारिता को पूंजीवाद और समाजवाद के बीच एक भारतीय विकल्प के रूप में स्थापित किया।

ग्रामीण भारत की रीढ़ माने जाने वाले किसान, कारीगर, लघु उद्यमी, श्रमिक और स्वयं सहायता समूह सहकार भारती के कार्यों के केंद्र में रहे हैं। दुग्ध सहकारिता, कृषि विपणन, ग्रामीण बैंकिंग, उपभोक्ता भंडार, आवास और श्रम सहकारिता जैसे क्षेत्रों में संगठन की भूमिका उल्लेखनीय रही है। सहकारी संस्थाओं को पारदर्शी, लोकतांत्रिक और सदस्य-केन्द्रित बनाने की दिशा में सहकार भारती ने निरंतर प्रयास किए हैं।

केंद्र सरकार द्वारा सहकारिता मंत्रालय की स्थापना ने सहकार भारती के विचारों को राष्ट्रीय मंच पर नई मजबूती दी है। “सहकार से समृद्धि” का संकल्प आज नीति और व्यवहार दोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इस अवसर पर पलवल जिला संघ चालक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज जब भारत आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, तब सहकारिता की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

डिजिटल तकनीक, नवाचार और युवा सहभागिता के साथ सहकारिता नए अवसरों के द्वार खोल रही है। आवश्यकता है कि सहकार भारती के विचार जन-जन तक पहुँचें और सहकारिता को केवल संस्था नहीं, बल्कि सहभागिता की संस्कृति के रूप में अपनाया जाए। राजवीर सिंह प्रान्त अध्यक्ष ने कहा कि स्थापना दिवस के अवसर पर यह संकल्प लेना होगा कि हम सहकारिता के मूल्यों—ईमानदारी, पारदर्शिता, सहभागिता और सेवा—को अपने जीवन में उतारें।

 

Prime Haryana
Author: Prime Haryana

Information with Confirmation

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp us

Exit mobile version