फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने के लिए बनाए जा रहे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण में सोतई गांव की जमीन का मामला अब प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है। जमीन पर कब्जे को लेकर किसानों के कड़े विरोध और विधानसभा में मामला उठने के बाद प्रशासन ने फिलहाल टकराव के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

सोतई गांव के किसान अपनी जमीन का कब्जा देने के लिए तैयार नहीं हैं। पिछले दिनों भूमि पर कब्जा लेने की कोशिश के दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी। पुलिस कार्रवाई के विरोध में किसानों ने धरना शुरू कर दिया था। इसके बाद आसपास के 12 गांवों के किसानों की पंचायत भी आयोजित हुई, जिसमें बिना मुआवजा दिए जमीन का कब्जा नहीं देने का निर्णय लिया गया।
विधायक ने विधानसभा में उठाया मामला
सोतई के किसानों के विरोध का मुद्दा पृथला के विधायक रघुबीर सिंह तेवतिया ने विधानसभा में उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन किसानों को मुआवजा दिए बिना पुलिस की मदद से जमीन पर कब्जा लेने की कोशिश कर रहा है। विधायक ने पुलिस कार्रवाई की जांच कराने की मांग भी की। उनका कहना था कि किसानों के विरोध के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और महिलाओं के साथ भी अभद्रता की गई।
उन्होंने सरकार से किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। विधायक के विधानसभा में मामला उठाने के बाद प्रशासन के सामने इस विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत और बढ़ गई है। भूमि के मालिकाना हक को लेकर किसानों और नगर निगम के बीच विवाद भी न्यायालय में चल रहा है।
32 किलोमीटर लंबा है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
सेक्टर-65 से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 32 किलोमीटर है। इसमें लगभग 23 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा और करीब 9 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में आता है। इस परियोजना के लिए सोतई गांव की जाट पट्टी शामलात भूमि का हिस्सा भी लिया जाना है। किसानों का कहना है कि बंदोबस्त के समय से ही वे इस जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और लंबे समय से उनका कब्जा है।
मुआवजे की राशि कोर्ट में जमा
भूमि अधिग्रहण को लेकर एक और पेच मुआवजे की राशि से जुड़ा है। भूमि अर्जन अधिकारी ने किसानों को सीधे मुआवजा देने के बजाय राशि न्यायालय में जमा करा दी है। साथ ही नगर निगम को पत्र भेजकर कहा गया है कि यदि संबंधित भूमि पर उसका अधिकार है तो वह न्यायालय के माध्यम से मुआवजे की राशि प्राप्त कर सकता है। चूंकि जमीन के अधिकार को लेकर अदालत का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है, ऐसे में किसानों और प्रशासन के बीच विवाद बना हुआ है।
पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा था तनाव
भूमि पर कब्जा लेने की कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी से ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया था। किसानों ने पुलिस पर कार्रवाई करने के आरोप लगाए। इसके बाद ग्रामीणों ने मौके पर धरना शुरू कर दिया और आसपास के गांवों के किसानों का समर्थन भी उन्हें मिलने लगा। प्रशासन के सामने अब चुनौती यह है कि एक्सप्रेसवे परियोजना का काम प्रभावित न हो और जमीन के विवाद को भी टकराव की स्थिति में पहुंचने से रोका जा सके। इसी वजह से अधिकारियों ने किसानों के साथ बातचीत को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
अधिकारियों ने बातचीत का रास्ता अपनाया
बल्लभगढ़ के एसडीएम मयंक भारद्वाज के अनुसार, किसानों से जमीन का कब्जा लेने को लेकर पिछले करीब एक वर्ष से बातचीत चल रही है। कई किसान प्रशासन के साथ सहमत भी हो चुके हैं और उनकी उपायुक्त के साथ बातचीत हो चुकी है। प्रशासन का प्रयास है कि सोतई के किसानों के साथ बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जाए और भूमि का कब्जा शांतिपूर्ण तरीके से लिया जा सके।
मयंक भारद्वाज, एसडीएम बल्लभगढ़ ने कहा कि किसानों से लगातार बातचीत की जा रही है। काफी किसान सहमत हो चुके हैं और प्रशासन चाहता है कि शेष किसानों के साथ भी बातचीत के जरिए मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकले। फिलहाल प्रशासन ने सख्ती के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया है। आने वाले दिनों में अधिकारियों और किसानों के बीच होने वाली बातचीत से तय होगा कि सोतई में जमीन के कब्जे का विवाद किस तरह सुलझता है और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को आगे बढ़ाने में कितनी तेजी आती है।
