चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब की भगवंत मान सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। पंजाब सरकार ने आरोप लगाया है कि चीफ जस्टिस की नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्य सरकार की सहमति और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री की सहमति लिए बिना ही जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास पंजाब के राज्यपाल की ओर से इस संबंध में पत्र आया था, लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से उस पर अभी जवाब या सहमति नहीं दी गई थी।
प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप
पंजाब सरकार का कहना है कि चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर केंद्र और राज्य के बीच निर्धारित प्रक्रिया के तहत विचार-विमर्श होना चाहिए था। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए नियुक्ति कर दी गई। उन्होंने इस मामले में पूर्व में हुई नियुक्तियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब राज्य की सहमति और विचार जानने की प्रक्रिया मौजूद है, तो उसे दरकिनार नहीं किया जाना चाहिए।
बीजेपी पर भी साधा निशाना
पंजाब सरकार ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा है। सरकार की ओर से आरोप लगाया गया कि इस तरह की नियुक्ति कर पंजाब के मुख्यमंत्री के पद और संवैधानिक भूमिका का अपमान किया गया है। इसी मुद्दे पर पंजाब कैबिनेट की बैठक भी आज शाम 4 बजे प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि बैठक में चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर सरकार की आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
जस्टिस मिश्रा की बेंच के एक फैसले का भी जिक्र
इस पूरे विवाद के बीच जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की बेंच द्वारा हाल ही में पंजाब सरकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिए गए आदेश का भी जिक्र हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मिश्रा की बेंच ने पंजाब सरकार को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) का भुगतान करने का आदेश दिया था। पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को डीए का भुगतान पहले से ही एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
हालांकि, चीफ जस्टिस की नियुक्ति और डीए मामले में हाईकोर्ट के आदेश को सीधे तौर पर जोड़ना उचित नहीं होगा। दोनों मुद्दे अलग-अलग हैं, लेकिन राजनीतिक बहस के दौरान डीए के फैसले का उल्लेख जरूर किया जा रहा है।
अब कैबिनेट बैठक पर नजर
चीफ जस्टिस की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार के विरोध के बाद अब सबकी नजर आज शाम होने वाली कैबिनेट बैठक पर है। बैठक में सरकार इस मामले पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर सकती है और आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि क्या जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति में पंजाब सरकार से अपेक्षित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सहमति ली गई थी या नहीं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
