यूपी में नदियां उफान पर, हज़ारों हेक्टेयर फसल डूबी;
हरियाणा-NCR में औसत से कम बारिश दर्ज,
IMD ने सितंबर में सामान्य से कम वर्षा की जताई आशंका
नई दिल्ली/चंडीगढ़, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। उत्तर भारत में मानसून का मिजाज़ इस बार बेहद असमान बना हुआ है। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं, वहीं हरियाणा-दिल्ली-NCR क्षेत्र में बारिश अब भी औसत से कम दर्ज हो रही है। इस असंतुलन ने किसानों से लेकर आम शहरी तक, सभी की चिंता बढ़ा दी है।

यूपी में बाढ़ जैसे हालात, फसलें डूबीं
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में लगातार बारिश के चलते नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। कई जगह पानी चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है, जिससे हज़ारों हेक्टेयर खेतों में लगी फसल जलमग्न हो गई है और दर्जनों गांवों में पानी घुस आया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी भारी बारिश का अलर्ट जारी रखा है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हरियाणा-NCR : बारिश की कमी, फिर भी शहरी इलाकों में जलभराव
दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली क्षेत्र में मौसमी बारिश अब भी औसत से पीछे चल रही है, लेकिन इसके बावजूद बीते हफ्तों में हुई तेज बारिश ने गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली के कई इलाकों में सड़कों को तालाब में बदल दिया। जलभराव के चलते भारी ट्रैफिक जाम लगा, दफ्तर आने-जाने वालों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी, और कई कंपनियों को कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम की सलाह देनी पड़ी। यह स्थिति साफ दिखाती है कि बारिश की मात्रा भले कम हो, पर शहरी ड्रेनेज सिस्टम की कमज़ोरी हर बार आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा देती है।
गुरुग्राम : हर बारिश में वही पुरानी कहानी
गुरुग्राम, जिसे देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट हब में गिना जाता है, हर मानसून में जलभराव की समस्या से जूझता नज़र आता है। बीते दिनों हुई भारी बारिश में शहर के पॉश इलाकों समेत सेक्टर-सड़कों, अंडरपास और मुख्य हाईवे पर पानी भर गया, जिससे मिलेनियम सिटी की रफ़्तार पूरी तरह थम गई। दफ़्तर जाने वाले हज़ारों कर्मचारी घंटों जाम में फंसे रहे, कई कंपनियों ने कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह जारी की, और गुरुग्राम पुलिस को खुद एडवाइज़री जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील करनी पड़ी।
सवाल यह उठता है कि आखिर इतने बड़े कॉर्पोरेट और रियल एस्टेट निवेश के बावजूद गुरुग्राम की ड्रेनेज व्यवस्था हर साल क्यों जवाब दे जाती है। शहर के कई निचले इलाकों — जहां सोसाइटियां और ऑफिस कॉम्प्लेक्स सालों पहले प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को पाटकर बनाए गए — वहां हर भारी बारिश में स्थिति और गंभीर हो जाती है। नगर निगम और GMDA (गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी) पर स्थायी समाधान की मांग एक बार फिर ज़ोर पकड़ने लगी है।
किसानों के लिए दोहरी चिंता
खरीफ सीजन के लिहाज़ से तस्वीर मिली-जुली है। जहां उत्तर प्रदेश में हाल की अच्छी बारिश से धान और गन्ने की फसल को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं मध्य भारत के कपास किसानों में गहरी बेचैनी है — किसानों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। वहीं बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे धान बहुल क्षेत्रों में पहले से ही बारिश की कमी दर्ज की जा रही है, जिससे वहां के किसान चिंतित हैं।
आगे क्या?
मौसम विभाग (IMD) ने सितंबर महीने में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है, खासकर पूर्वी और उत्तरी धान उत्पादक क्षेत्रों में। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अब नई बुवाई की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है, इसलिए इस साल की कुल फसल पैदावार मुख्य रूप से अगस्त-सितंबर में मिलने वाली बारिश पर ही निर्भर करेगी। ऐसे में आने वाले दिन किसानों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं के लिए भी अहम साबित होंगे, क्योंकि फसल उत्पादन में कमी सीधा असर सब्ज़ी-अनाज की कीमतों पर डाल सकती है।
