‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से पहचाने जाने वाले उत्तराखंड के दीपक कुमार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोटद्वार में अपना जिम चलाने वाले दीपक पर दर्ज एफआईआर में चल रही कार्रवाई और पुलिस जांच पर कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने मामले में उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है.
कैसे शुरू हुआ मामला?
दीपक के लिए पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि 26 जनवरी को कोटद्वार में बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की कपड़े की दुकान पर पहुंचे थे. उन्होंने दुकान के नाम ‘बाबा गारमेंट्स’ को लेकर आपत्ति जताई थी. उन्होंने दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने की मांग की थी. उसी मार्केट में ‘हल्क जिम’ चलाने वाले दीपक कुमार ने इस मामले में बीच-बचाव किया.
दीपक बने मोहम्मद दीपक
सिंघवी ने जजों को बताया कि दीपक ने एक सभ्य नागरिक होने का फर्ज निभाया. उन्होंने ‘बाबा गारमेंट्स’ नाम का बचाव किया. दीपक ने सिर्फ यही कहा था कि दुकान कई साल से इसी नाम से चल रही है. इसलिए, नाम बदलने का दबाव बनाना गलत है. बहस के दौरान जब कुछ लोगों ने दीपक से उनकी पहचान पूछी. तब उन्होंने कहा, “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है.” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
दीपक के खिलाफ केस
घटना के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत की. बजरंग दल के लोगों की शिकायत थी कि दीपक और उनके एक साथी ने दंगा भड़काने की कोशिश की. इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया. दीपक ने केस रद्द कराने और सुरक्षा की मांग को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की.
हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत
दीपक ने एफआईआर रद्द करने के साथ ही पुलिस की भूमिका की जांच की मांग भी की थी. हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया. हाई कोर्ट ने दीपक को सोशल मीडिया पर बयान देने से बचने और जांच में पुलिस का सहयोग करने का भी निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दीपक कुमार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में आगे की कार्रवाई और पुलिस जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें दीपक को मामले को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से रोका गया था.
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