संघ प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में हुए कार्यक्रम के एक बयान पर अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार किया है, उन्होंने इसे ‘एक पुरानी चाल’ कहकर तंज कसा है. मोहन भागवत ने अमेरिका में अपने एक कार्यक्रम में शनिवार को कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा.
इसपर ओवैसी ने कहा है कि यह आरएसएस की पुरानी चाल है. कुछ बातें दुनिया के लिए होती है. कुछ अपने सदस्यों के लिए होती है.
आरएसएस ने कभी अपने लेखकों और विचारकों को किनारा नहीं किया
ओवैसी ने कहा, आरएसएस ने कभी भी अपने मुख्य विचारकों और लेखकों की बातों से किनारा नहीं किया है. वे मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यकों के बारे में क्या कहते हैं? यह बात जगजाहिर है कि आरएसएस ने हमारी आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं दिया. इसके संस्थापक हेडगेवार इंडियन नेशनल कांग्रेस में थे. लेकिन उन्होंने इसे छोड़ दिया क्योंकि वे गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई में सभी धार्मिक समुदायों के शामिल होने के खिलाफ थे. आरएसएस की तरफ से प्रकाशित की जीवनी में बताया गया है कि कैसे वे इंडियन नेशनल कांग्रेस से अलग हुए, क्योंकि ‘गांधीजी हमेशा हिंदू मुस्लिम एकता को ध्यान में रखकर काम करते थे, लेकिन डॉक्टरजी को इस कदम में खतरा महसूस हुआ. असल में उन्हें हिंदू मुस्लिम एकता का नया नारा भी पसंद नहीं आया.’
ओवैसी ने इस बयान के पीछे बकायदा किताब और उसके संपादक का जिक्र भी किया है. उन्होंने बताया कि यह बातें, डॉ. हेडगेवार, द एपोक मेकर: ए बायोग्राफी, साहित्य सिंधु, बैंगलोर, 1981 पेज नंबर 611 पर दर्ज है. इसके संपादक एचवी हैं.
इसके अलावा उन्होंने एसएस गोलवलकर, श्री गुरुजी समग्र दर्शन, भारतीय विचार साधना नागपुर बिना तारीख, खंड I, पेज 11 का हवाला देकर कहा कि आरएसएस लोकतंत्र का विरोध करता है. हमेशा तानाशाही की मांग करता रहा है. गोलवलकर ने 1940 में कहा था कि आरएसएस एक रंग (भगवा), एक नेता और एक विचारधारा से प्रेरित है.
इसके अलावा उन्होंने कई अखबारों के बयान का हवाला देते हुए बताया, ‘क्या हमें सब भूल जाना चाहिए जो आरएसएस के परोक्ष शासन के दौरान गुजरात के मुसलमानों के साथ हुआ था? बेटियों के साथ उनके पिता सामने गैंग रेप किया गया. फिर उनके सिर कुचल दिए गए. उनके पिताओं पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई. उनकी संपत्ति लूट ली गई. उनके कारोबार बर्बाद कर दिए गए. पुलिस खड़ी देखती रही. कुछ नहीं किया. यह हिंदुस्तान टाइम्स के नई दिल्ली से प्रकाशित अखबार में 21 मार्च 2002 को छापा गया था. ऐसा ओवैसी ने अपने पोस्ट में बताया है.
ईसाई और मुसलमान आरएसएस के लिए खतरा: ओवैसी
इसके अलावा ओवैसी ने कहा कि आरएसएस के लिए भारतीय मुसलमान और ईसाई क्रमश: नंबर एक और नंबर दो के आंतरिक खतरे हैं. गोलवलकर की किताब बंच ऑफ था थॉट्स में इंटरनल थ्रेट्स नाम का एक लंबा चैप्टर है. इसमें भारत के मुस्लिम और ईसाई नागरिकों को क्रमश: पहला और दूसरा खतरा बताया गया. गोलवलकर का कहना है कि मुस्लिम नागरिकों को हमेसा शक की नजर से देखा जाना चाहिए.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि ईसाइयों के बारे में गोलवलकर ने कहा है कि यह समुदाय हमारे जीवन के धार्मिक और सामाजिक ताने बाने को नष्ट करने पर तुला हुआ है.
यूसीसी के नाम पर मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपे जा रहे हैं: ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि आरएसएस की विचारधारा के तहत ही यूसीसी के नाम पर मुसलमानों पर हिंदू कानून थोपे जा रहे हैं. ईसाइयों को कठोर ‘धर्म-परिवर्तन विरोधी’ कानूनों के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है. UAPA जैसे कानूनों के गंभीर दुरुपयोग को भी नहीं भूलना चाहिए. भागवत से मेरी गुजारिश है कि वे सावरकर, हेडगेवार, गोलवलकर वगैरह की जहरीली रचनाओं के कुछ चुने हुए हिस्से पढ़कर सुनाएं. लोगों को यह तय करने दें कि वे RSS के बारे में क्या सोचते हैं.
