IIT दिल्ली में छात्र ऋषिकेश की मौत के बाद प्रदर्शन कर रहे हैं. डायरेक्टर के साथ हुई बैठक के बाद छात्रों ने एक बार फिर अपनी मांगें सामने रखी हैं. छात्रों का कहना है कि वे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच चाहते हैं. उनका कहना है कि जांच सिर्फ संस्थान की व्यवस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऋषिकेश की मां की ओर से अधिकारियों और स्टाफ पर लगाए गए गंभीर आरोपों की भी जांच होनी चाहिए.
छात्रों के मुताबिक, डायरेक्टर ने स्वतंत्र जांच कमेटी के अध्यक्ष को बदलने और प्रदर्शन कर रहे छात्रों की ओर से कुछ छात्रों को कमेटी में शामिल करने पर सहमति दी है. छात्रों का कहना है कि अगर जांच में किसी की गलती सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.
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छात्रों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक एसोसिएट डीन, हॉस्टल मैनेजमेंट और एसोसिएट डीन, स्टूडेंट वेलफेयर के पदों पर कार्यवाहक अधिकारी नियुक्त किए जाएं. उनका कहना है कि इससे जांच पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से हो सकेगी.
छात्रों ने स्वतंत्र जांच कमेटी के लिए जस्टिस एस. मुरलीधर, जस्टिस मुक्ता गुप्ता और जस्टिस आशा मेनन के नाम भी सुझाए हैं. छात्रों का कहना है कि 27 अगस्त को वे कमेटी में अपने प्रतिनिधियों के नाम तय करेंगे.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने IIT दिल्ली से कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद और मानसिक परेशानी के मामलों में कार्रवाई के लिए पहले से मौजूद नियमों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की है. छात्रों का कहना है कि संस्थान में छात्रों की मदद और शिकायतों से जुड़ी व्यवस्था को लेकर पारदर्शिता जरूरी है.
परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग
मुआवजे को लेकर भी छात्रों ने अपनी मांग साफ कर दी है. छात्रों का कहना है कि ऋषिकेश के परिवार को उचित आर्थिक मदद मिलनी चाहिए और इसके लिए करीब 1 करोड़ रुपये की मांग की गई है.
छात्रों के मुताबिक, IIT दिल्ली प्रशासन ने यह रकम जुटाने के लिए संस्थान की मदद, मेडिकल खर्च और फंडरेजर के जरिए पैसा जुटाने का सुझाव दिया है. छात्रों की मांग है कि 1 करोड़ रुपये जुटाने की जिम्मेदारी IIT दिल्ली प्रशासन खुद ले और यह भी बताए कि रकम कब तक जुटाई जाएगी.
छात्रों का कहना है कि अगर फंडरेजर से पूरी रकम नहीं आती है तो बाकी रकम की व्यवस्था के लिए दूसरे रास्ते भी तलाशे जाएं. उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी की जिंदगी की कीमत तय करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन ऋषिकेश के दोस्तों ने उसकी आर्थिक स्थिति और कैंपस के बाहर रहने की मजबूरी को देखते हुए परिवार के लिए आर्थिक मदद की मांग की है.
एसोसिएट डीन, स्टूडेंट वेलफेयर के इस्तीफे की मांग
छात्रों ने एसोसिएट डीन, स्टूडेंट वेलफेयर के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है. छात्रों का कहना है कि वे इस अधिकारी को सीधे तौर पर ऋषिकेश की मौत के लिए जिम्मेदार नहीं बता रहे हैं.
हालांकि, छात्रों के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार, असंवेदनशील बातें और मदद मांगने वाले छात्रों को डांटने जैसी चीजों से छात्रों का संस्थान की मदद व्यवस्था पर भरोसा कम होता है.
छात्रों ने बताया कि वे इस अधिकारी की छात्रों के साथ बातचीत से जुड़े ईमेल, मैसेज और दूसरे सबूत जुटा रहे हैं. इसके अलावा आत्महत्या से जान गंवाने वाले छात्रों को लेकर फैकल्टी और स्टाफ की ओर से की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े सबूत भी जमा किए जा रहे हैं.
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पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं. छात्रों का आरोप है कि सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मियों ने IIT दिल्ली की मेन बिल्डिंग के विंड टनल के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों की रिकॉर्डिंग की. छात्रों ने IIT दिल्ली प्रशासन से मांग की है कि वह छात्रों के प्रदर्शन करने, न्याय मांगने और संस्थान से जवाब मांगने के अधिकार की स्पष्ट गारंटी दे.
उनका कहना है कि ये मांगें सिर्फ मौजूदा मामले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि IIT दिल्ली में छात्रों की मदद और शिकायतों से जुड़ी पूरी व्यवस्था में लंबे समय के बदलाव की भी जरूरत है. छात्रों ने अपनी मांगों के साथ #JUSTICE FOR RISHIKESH का नारा भी दिया है.
