दिल्ली में बारिश भले ही कुछ घंटों की हो लेकिन कई वीआईपी और प्रमुख इलाकों में पानी घंटों तक जमा रहता है. जिन जगहों पर पहले मामूली जलभराव होता था, वहां अब सड़कें पानी में डूब जाती हैं और कई जगह पानी दुकानों के अंदर तक पहुंच रहा है. आखिर पानी की निकासी इतनी धीमी क्यों हो गई है? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए abp न्यूज़ ने कनॉट प्लेस और सदर बाजार में ग्राउंड पड़ताल की. साथ ही एक्सपर्ट से बात कर जलभराव की तकनीकी वजह समझने की कोशिश की.
abp न्यूज़ की पड़ताल की शुरुआत कनॉट प्लेस से हुई. 25 अगस्त को दिल्ली में कुछ घंटे की बारिश के बाद कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल पर भारी जलभराव हो गया था. इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए abp न्यूज़ ने आउटर सर्किल पर स्थित प्रमुख दुकानों में से एक में काम करने वाले माधो सिंह रावत से बात की.
माधो सिंह रावत ने बताया कि 25 अगस्त को हुई बारिश के बाद पानी उनकी दुकान और किचन तक घुस गया था. सरकार की ओर से लगाए गए वाटर पंप की मोटर चलाने के बावजूद पानी नहीं निकल रहा था. बारिश रुकने के करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर पानी निकल पाया. उन्होंने दुकान के बाहर ओवरफ्लो हुई नाली दिखाते हुए बताया कि पिछले दो-तीन साल से यहां जलभराव की समस्या लगातार बढ़ी है.
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एक अन्य दुकानदार ने बताया कि वह करीब 20 साल से यहां काम कर रहे हैं. उनके मुताबिक, 25 अगस्त को दुकान में करीब 5 फीट तक पानी भर गया था. इसे निकालने में करीब ढाई घंटे लगे. दुकानदारों का कहना है कि पहले पानी मिंटो ब्रिज के आसपास जमा होता था, लेकिन अब कनॉट प्लेस में भी ज्यादा जलभराव होने लगा है.
सदर बाजार में 5-6 फीट पानी पहुंचने का दावा
इसके बाद abp न्यूज़ की टीम सदर बाजार पहुंची. यहां फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश यादव ने दावा किया कि करीब 40 हजार दुकानदार जलभराव से प्रभावित हैं. उनके मुताबिक, 1905 के बाद से यहां कोई प्रभावी नया ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया.
राकेश यादव के मुताबिक, सदर बाजार आसपास के इलाकों से करीब 14-15 फीट नीचे है. ऐसे में बारिश का पानी बहकर यहां पहुंचता है. कई बार हालात इतने खराब हो जाते हैं कि दुकानों के अंदर 5-6 फीट तक पानी घुस जाता है.
व्यापारियों ने बंद नालियों, अतिक्रमण और कूड़ा-कचरे को भी जलभराव की बड़ी वजह बताया. उनका कहना है कि नालियों के ऊपर बने रैंप और अतिक्रमण के कारण सफाई ठीक से नहीं हो पाती. इसके अलावा कूड़ा-कचरा नालियों को चोक कर देता है. व्यापारियों की मांग है कि पुरानी पाइपलाइन को हटाकर ज्यादा क्षमता वाली नई पाइपलाइन डाली जाए, ताकि बारिश के पानी की निकासी तेजी से हो सके.
एक्सपर्ट ने बताई जलभराव की तकनीकी वजह
जलभराव की तकनीकी वजह समझने के लिए abp न्यूज़ ने दिल्ली सरकार में इंजीनियर-इन-चीफ रह चुके सिविल इंजीनियर दिनेश कुमार से बात की. उन्होंने बताया कि ड्रेनेज सिस्टम घर की छोटी नाली से शुरू होकर छोटी और फिर बड़ी नाली तक जाता है. इस पूरी व्यवस्था के किसी भी हिस्से में रुकावट आने पर पानी की निकासी प्रभावित होती है.
दिनेश कुमार के मुताबिक, दिल्ली के कई पुराने और नई दिल्ली के इलाके ऊंचाई पर हैं. इसलिए अगर ड्रेनेज सिस्टम सही तरीके से काम करे और उसकी नियमित सफाई होती रहे तो यहां पानी लंबे समय तक नहीं रुकना चाहिए. लेकिन बाजारों में कूड़ा, चोक नालियां, अतिक्रमण और दुकानों के बाहर बने रैंप पानी का रास्ता रोक रहे हैं.
उन्होंने बताया कि चांदनी चौक और आसपास के इलाकों का ड्रेनेज सिस्टम भी काफी पुराना है. कई जगह पुरानी संरचनाएं क्षतिग्रस्त होकर अंदर बैठ चुकी हैं. इसका असर पानी की निकासी पर साफ तौर पर दिखाई देता है.
15 मिनट का पानी अब 1-2 घंटे में निकल रहा
दिनेश कुमार ने बताया कि पहले जो पानी करीब 15 मिनट में कनॉट प्लेस से मिंटो ब्रिज की तरफ चला जाता था, अब उसे निकलने में एक से दो घंटे तक लग रहे हैं. फिलहाल मिंटो ब्रिज पर पानी नहीं भर रहा है, लेकिन उनका कहना है कि सितंबर में अगर ज्यादा बारिश हुई तो वहां भी जलभराव की स्थिति बन सकती है.
एक्सपर्ट के मुताबिक, दिल्ली में पंपिंग सिस्टम पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है, लेकिन सिर्फ पंप लगाकर पानी निकालना स्थायी समाधान नहीं है. छोटे पंपों से पानी एक नाली से दूसरी नाली में डालने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती. अगर आगे पानी के डिस्पोजल की व्यवस्था नहीं होगी तो वही पानी दोबारा सड़क पर जमा हो सकता है.
पूरे ड्रेनेज सिस्टम के लिए यूनिफाइड कमांड की जरूरत
दिनेश कुमार ने दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम के लिए यूनिफाइड कमांड की जरूरत बताई. उनके मुताबिक, छोटी नाली से लेकर बड़े नाले और पानी के अंतिम डिस्पोजल तक पूरी व्यवस्था को एक साथ जोड़कर मैनेज करना होगा. अलग-अलग एजेंसियों के स्तर पर काम करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाएगा.
उन्होंने कहा कि दिल्ली को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए ड्रेनेज सिस्टम की जरूरत है. 2047 के मास्टर प्लान में भी इसे लेकर प्रावधान किया गया है. हालांकि नया सिस्टम तैयार होने में समय लगेगा, इसलिए तब तक मौजूदा नालियों की नियमित सफाई और बेहतर मेंटेनेंस सबसे जरूरी है.
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दिल्ली में जलभराव की वजह सिर्फ बारिश नहीं है. पुराना ड्रेनेज सिस्टम, चोक नालियां, कूड़ा-कचरा, अतिक्रमण और कमजोर मेंटेनेंस भी इसके पीछे बड़ी वजह हैं. बारिश के बाद हर बार पंप लगाकर पानी निकालना तत्काल राहत तो दे सकता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं है. असली जरूरत ऐसे एकीकृत ड्रेनेज सिस्टम की है, जो तेज बारिश के दौरान भी पानी को तेजी से बाहर निकाल सके. अब सवाल यही है कि दिल्ली को ऐसा स्थायी और एकीकृत ड्रेनेज सिस्टम आखिर कब मिलेगा?
