दिल्ली: 56 हजार करोड़ का मास्टर प्लान, घर-घर पहुंचेगा पानी


दिल्ली की पानी और वैश्वीकरण व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़े स्तर पर बदलावों की खोज सामने रखी है. राजधानी के स्थिर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लेकर नए पाइपलाइन, डीलरशिप, एसएसई और पोर्टफोलियो की समस्या को दूर करने के लिए कई स्टेशनों को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को बताया कि इसके लिए 56 हजार करोड़ रुपये का वॉटर मास्टर प्लान तैयार किया गया है.

इस योजना के लिए वित्त मंत्रालय के माध्यम से एशियाई बैंक से 2500 करोड़ रुपये का ऋण विचार हुआ है. इस राशि में 70 फ़ीसदी एडीबी की होगी, जबकि शेष 30 फ़ीसदी स्टॉक दिल्ली सरकार की होगी. वजीराबाद वॉटर प्लांट के कमांड एरिया में ही दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों का कारोबार चल रहा है. इनमें 805 करोड़ रुपये का पहला और 935 करोड़ रुपये का दूसरा नोट शामिल है.

जल बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी निर्णय

पानी की बड़ी कंपनी के साथ दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों से जुड़ी व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. मुख्यमंत्री ने बताया कि बोर्ड के 18 हजार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. जल बोर्ड के बोर्ड और जमीन से जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन की गारंटी के लिए ट्रांज़िशन एड डिक्लेरेशन की नियुक्ति की प्रक्रिया भी प्रस्तावित है.

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बारिश में डूबने वाले 169 स्थान पर नजर

जल मंत्री का प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार सरकार केवल प्रिंस नेटवर्क तक सीमित नहीं है. पानी के विक्रेताओं के लिए अलग-अलग लक्जरी मास्टर प्लान भी तैयार किया गया है. साल 2025 में ट्रैफिक पुलिस ने दिल्ली में 169 ऐसी जगहों की पहचान की, जहां पर दफ़नाने की समस्या सामने आई थी. इनमें से 60 स्थानों पर सुधार कार्य चल रहा है.

पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में 36.4 लाख लोगों को फायदा

राजधानी के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों के लिए 11,427 करोड़ रुपये के बड़े बदलाव की योजना बनाई गई है. इसके तहत करीब 3,830 किलोमीटर जल नेटवर्क को मजबूत करने का लक्ष्य है. प्रस्तावित योजना से लगभग 36.4 लाख जनसंख्या को लाभ मिलने की उम्मीद है. इस परियोजना को शहरी चैलेंज फंड के तहत आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है. फंडिंग का मॉडल भी तय किया गया है. इसमें 25 फीसदी केंद्र सरकार, 25 फीसदी दिल्ली सरकार और बाकी 50 फीसदी रशी लोन या PPP मॉडल के जरिए माइनॉल का ऑफर है.

एशिया में कुछ यूजीआर और बूस्टर पंप से पोस्टपोरेट

पानी की झीलों के लिए अलग-अलग मंजिलों में प्रवेश द्वार यानि युजीआर तैयार किये जा रहे हैं. शकूर बागान के हर्ष विहार में 18 MLD  का युजीआर प्रस्तावित है. ओखला के बाटला हाउस में 2.2 एमजीडी और अबुल फजल में 3.7 एमजीडी क्षमता के युजीआर-बूस्टर पंप की व्यवस्था जारी है. इन निबंधों से करीब 2 लाख लोगों की कमाई का अनुमान है.

कई जल संयंत्र संयंत्र तैयारियाँ, पाइपलाइन विस्तार जारी

जल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम हुआ. द्वारका में 50 एमजीडी, चंद्रावल में 105 एमजीडी और बवाना में 2 एमजीडी क्षमता वाले वॉटर प्लांट प्लांट पूरे हो गए हैं. बिजवासन, पल्ला और सिरसपुर में भी यूजर तैयार हो गए हैं. चंद्रावल कमांड क्षेत्र में पानी की पहुंच बढ़ाने के लिए 1200 करोड़ रुपये के विस्तार परियोजना पर काम जारी है.

8 क्षेत्रीय क्षेत्रफल तक एशिया आधुनिक जल नेटवर्क

एक अन्य परियोजना के तहत 43.96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पानी की व्यवस्था पर जोर देने की तैयारी है. इसमें 9 यूजीआर और 8 विधानसभा क्षेत्र शामिल होंगे. मुखर्जी नगर, मॉडल टाउन, जहांगीरपुरी, आजादपुर, केशवपुरम, पीतमपुरा, शालीमार बाग, त्रिनगर, पश्चिम विहार, रानी बाग, वजीरपुर और अशोक विहार जैसे पूर्वी को योजना का लाभ मिलेगा.
कुल 836 किमी का आधुनिक नेटवर्क विकसित हुआ. 570 किलोमीटर नई पाइपलाइन पाइपलाइन जाएगी. साथ ही 2.15 लाख घर कनेक्शन देने और हर कनेक्शन पर मीटर लगाने का लक्ष्य है.

पानी की बर्बादी में 15 फीसदी होने वाले नुकसान का लक्ष्य

योजना में सिर्फ नए पाइपलाइन प्लांट पर जोर नहीं है, बल्कि पानी के नुकसान को कम करना भी अहम लक्ष्य है. नॉन-रेवेन्यू वॉटर का स्तर 45 प्रतिशत बताया गया है. इसे 15 प्रतिशत तक का लक्ष्य रखा गया है. इससे संबंधित होने वाले पानी और स्मारक तक वास्तव में पहुंचने वाले पानी के बीच वाली नदी को कम करने की कोशिश की जाएगी.

पिछले साल एसटीपी और प्रोजेक्ट्स पर जोर बढ़ा

28 नए डिसेंट्रल प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए 28 नए डिसेंट्रल उपकरण एस्टीपीटोकन जाएं. इनके लिए 2,990 करोड़ रुपये के वर्कशॉप ऑर्डर जारी हो चुके हैं. इसके साथ पुराने एसटीपी को आधुनिक बनाने के लिए 1,090 करोड़ रुपये के काम के बारे में भी सोचा गया है.

अनधिकृत ढांचे में हज़ारों घर तक मध्यवर्तीगा कनेक्शन

ईस्टर्न नेटवर्क को संयुक्त राज्य अमेरिका तक ले जाने पर भी जोर दिया गया है जहां अभी भी व्यवस्था शुरू की गई है. 114 प्रोटोटाइप में 2,012 करोड़ रुपये की लागत से लॉन्च नेटवर्क पूरा किया जाएगा. इससे 1,28,633 घरों को कनेक्शन मीटिंग की योजना है. इसके अलावा 276 इंजीनियरों से संबंधित काम पहले से चल रहे हैं. 647 में 5.44 लाख प्लांट को एडवेंचर कनेक्शन देने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है.

सरकार का फोकस राजधानी में जल की दृष्टि को बढ़ाने के साथ-साथ पुरानी पाइपलाइन, जल विक्रेताओं और क्रम व्यवस्था को भी चरणबद्ध तरीके से मजबूत करना है.

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Author: Prime Haryana

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