दिल्ली के 25 औद्योगिक इलाकों पर HC सख्त, यमुना में गंदा पानी रोकने के लिए मांगा एक्शन प्लान


दिल्ली के 25 नॉन-कन्फर्मिंग इंडस्ट्रियल एरिया के विकास को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा कि इन इलाकों का दोबारा विकास बेहद जरूरी है. क्योंकि यहां से निकलने वाला बिना ट्रीटमेंट का गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है. इससे नदी प्रदूषित होने के साथ-साथ कई इलाकों में जलभराव की समस्या भी बनी हुई है.

दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने पाया कि 25 इलाकों के पुनर्विकास के लिए अलग-अलग एजेंसियों ने योजनाएं तैयार कर डीएसआईआईडीसी को भेजी थीं. डीएसआईआईडीसी ने इन्हें एमसीडी और फिर एमसीडी ने डीडीए को भेजा था. मास्टर प्लान के कुछ नियमों में छूट मांगी गई थी लेकिन डीडीए की ओर से जवाब नहीं आने के कारण पूरा काम ठप पड़ा था.

नया मास्टर प्लान बताकर रुका रहा काम

सुनवाई के दौरान डीडीए ने बताया कि पहले यह मामला मास्टर प्लान-2021 के तहत देखा जा रहा था.लेकिन अब नया मास्टर प्लान आ गया है. इसी वजह से आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी. कोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विभागों के बीच तालमेल की कमी से महत्वपूर्ण काम को इस तरह नहीं रोका जा सकता.

दिल्ली हाई कोर्ट ने डीडीए के अतिरिक्त आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह 31 अगस्त को सभी संबंधित विभागों की बैठक बुलाएं.बैठक में यह तय किया जाएगा कि सीवर लाइन और गंदे पानी की निकासी के लिए जरूरी मंजूरियां कब और कैसे मिलेंगी. कोर्ट ने सभी कामों की स्पष्ट समयसीमा तय करने को कहा है.

समायपुर बादली के लिए नए सिरे से बनेगा प्लान

समयपुर बादली औद्योगिक इलाके के लिए अभी योजना तैयार नहीं हुई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने डीडीए, उद्योग मंत्रालय, दिल्ली सरकार, एमसीडी और डीएसआईआईडीसी को पूरे इलाके की सीमा तय करने और दस्तावेजों की जांच करने का निर्देश दिया है. इसके बाद एजेंसी स्क्वायर डिजाइन को नए सिरे से पुनर्विकास की योजना तैयार करनी होगी. इसके लिए 2 सितंबर को उद्योग मंत्रालय, जीएनसीटीडी के सचिव की अध्यक्षता में बैठक होगी. इसमें सभी संबंधित विभागों के अधिकारी और औद्योगिक संगठनों के दो प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. कोर्ट ने स्क्वायर डिजाइन को तीन महीने के भीतर समायपुर बादली का नया प्लान तैयार करने को कहा है.

13 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी

कोर्ट ने स्थानीय आयुक्तों की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया. रिपोर्ट में सामने आया कि सीवेज का केवल कुछ हिस्सा ही ट्रीट हो रहा है जबकि बाकी गंदा पानी बिना उपचार के यमुना में पहुंच रहा है. इसे रोकने के लिए 13 नए डोमेस्टिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 328 एमजीडी होगी. 

इनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर नमामि गंगे परियोजना प्राधिकरण को भेजी जा चुकी है. कोर्ट ने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के महानिदेशक को इस मामले को देखने का निर्देश दिया है.

ट्रीट किया पानी फिर गंदे पानी में न मिले

स्थानीय आयुक्तों ने एक और गंभीर समस्या बताई कि कुछ जगह ट्रीट होने के बाद साफ किए गए पानी को फिर उसी नाले में छोड़ दिया जाता है.जिसमें बिना ट्रीटमेंट का गंदा पानी बह रहा है.इससे सीवेज ट्रीटमेंट का मकसद ही खत्म हो जाता है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि मौजूदा और प्रस्तावित नए एसटीपी के लिए अलग ड्रेनेज की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए. टेंडर जारी करते समय इस पहलू को ध्यान में रखा जाए और पूरे काम की निगरानी दिल्ली जल बोर्ड करे.

ओखला के अबुल फजल ड्रेन की तस्वीरें देखने के बाद हाईकोर्ट ने स्थिति पर गंभीर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि खुले नाले के किनारे न तो सुरक्षा दीवार है और न ही उसे ढका गया है. ऐसे में यह स्थानीय लोगों और आने-जाने वालों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. कोर्ट ने एमसीडी को बिना किसी और एनओसी का इंतजार किए तुरंत नाले के किनारे सेफ्टी वॉल बनाने और जरूरत के मुताबिक उसे स्लैब से ढकने का निर्देश दिया है. साथ ही नाले की नियमित डी-सिल्टिंग यानी गाद निकालने को भी कहा गया है.

25 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने डीएसआईआईडीसी, डीडीए, एमसीडी और दिल्ली सरकार के उद्योग मंत्रालय से काम की स्टेटस की नई रिपोर्ट मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी. कोर्ट के आदेश से साफ है कि अब 25 औद्योगिक इलाकों के पुनर्विकास, सीवेज प्रबंधन और जलभराव की समस्या को लेकर विभागों को तय समयसीमा में काम करना होगा.



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Author: Prime Haryana

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