बेटर हाफ कब बिटर हाफ बन जाए, पता नहीं चलता, दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के रिश्ते में बढ़ते तनाव और हिंसा पर यह अहम टिप्पणी की है. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि शादी दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक है. लेकिन जब पति-पत्नी के बीच विवाद समय रहते नहीं सुलझता तो यही रिश्ता बेहद खराब मोड़ ले सकता है. रिश्ते में आई कड़वाहट का असर सिर्फ पति-पत्नी तक सीमित नहीं रहता. बल्कि पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है.
समय पर विवाद नहीं सुलझा तो बढ़ सकती है दूरी
दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस विमल कुमार यादव ने कहा कि शादी का रिश्ता भरोसे, साथ और एक-दूसरे को सुरक्षा का एहसास देने पर टिका होता है. लेकिन जब यही भरोसा टूटता है तो रिश्ता धीरे-धीरे संघर्ष का मैदान बन सकता है और कई बार इसमें शारीरिक हिंसा भी शामिल हो जाती है. कोर्ट ने कहा कि समय कई जख्म भर देता है, लेकिन रिश्तों में समस्या को सुलझाने में जरूरत से ज्यादा देर करना उल्टा नुकसान भी कर सकता है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक ऐसे मामले में की जिसमें एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी को बेयरगॉन कीटनाशक पिलाकर जान से मारने की कोशिश करने का आरोप था. ट्रायल कोर्ट ने नफे सिंह को हत्या के प्रयास के मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी. नफे सिंह ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
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सबूत कमजोर हैं, सिर्फ शक के आधार पर सजा नहीं – हाई कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद नफे सिंह को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसा ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश नहीं कर पाया. जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी की मंशा और जानकारी आईपीसी की धारा 307 के तहत हत्या की कोशिश वाली थी. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के कमजोर और डगमगाते सबूतों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना सुरक्षित नहीं है. इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया.
मामले के मुताबिक नफे सिंह और महिला की शादी साल 2000 में हुई थी। शादी के करीब एक साल बाद ही दोनों के रिश्तों में खटास आ गई. अभियोजन का आरोप था कि साल 2001 में घरेलू विवाद के दौरान पति ने पहले पत्नी को गिलास से कीटनाशक पीने के लिए मजबूर करने की कोशिश की. जब वह इसमें सफल नहीं हुआ तो उसने कथित तौर पर कंटेनर से सीधे उसके मुंह में कीटनाशक डाल दिया.
पति का दावा- अलग घर में रहने को लेकर था विवाद
घटना के बाद पति और उसकी मां के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. हालांकि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी की मां को बरी कर दिया था. जबकि नफे सिंह को हत्या के प्रयास का दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी. नफे सिंह ने आरोपों से इनकार किया. उसकी ओर से दलील दी गई कि पत्नी उसके साथ अलग घर में रहना चाहती थी और अपनी विधवा मां को साथ नहीं रखना चाहती थी. इसी बात को लेकर दोनों के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था.
कोर्ट ने कहा- रिश्ते को संभालना दोनों की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने कहा कि पति-पत्नी के बीच भरोसे और विश्वास से बना रिश्ता जब विवाद में बदलता है तो उसका असर परिवार की अगली पीढ़ी तक पड़ सकता है. कोर्ट ने यह भी कहा कि हाल के वर्षो में पति-पत्नी के बीच हिंसा के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनकी कुछ दशक पहले कल्पना भी मुश्किल थी. ऐसे में रिश्तों में पैदा होने वाली समस्याओं को समय रहते बातचीत और समझदारी से सुलझाना बेहद जरूरी है.
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