दिल्ली हाईकोर्ट ने रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्व विद्यालय आश्रम में महिलाओं और लड़कियों को कथित तौर पर बंधक बनाए जाने के पुराने आरोपों के बीच बेहद सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि आश्रम की गतिविधियों और उसके संचालन के तरीके की जांच जरूरी है. समाज को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इन आश्रमों के अंदर आखिर क्या हो रहा है?
आश्रम संचालक वीरेंद्र देव दीक्षित की मौत की जानकारी
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि लंबे समय से फरार चल रहे स्वयंभू आध्यात्मिक गुरु वीरेंद्र देव दीक्षित की मौत हो चुकी है. इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि अब आश्रमों की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है और वहां होने वाली गतिविधियों के लिए जवाबदेह कौन है?
मामले में एक महिला के परिजनों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उनका कहना है कि महिला आश्रम में रह रही थी, लेकिन अब उसका कोई पता नहीं है. हैरानी की बात यह है कि उसका सामान और निजी सामान अभी भी रोहिणी स्थित आश्रम में मौजूद है. कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विजय विहार थाना एसएचओ को महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है. जांच की रिपोर्ट 31 अगस्त को कोर्ट के सामने पेश करनी होगी.
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कोई तो जिम्मेदारी लेने वाला होना चाहिए – कोर्ट
महिला के परिजनों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उसके पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं. माता-पिता उम्रदराज हैं और उनकी देखभाल करने वाला कोई दूसरा नहीं है. उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए अपनी बेटी से बात की थी और उसकी हालत भी ठीक नहीं लगी. परिजनों का कहना है कि वे अपनी बेटी को अपने पास बुलाना चाहते थे. लेकिन उसने उनके साथ आने से इनकार कर दिया.
कोर्ट ने साफ कहा कि किसी की आस्था या धार्मिक विश्वास में दखल देने का उसका कोई इरादा नहीं है. लेकिन आस्था की आड़ में जवाबदेही खत्म नहीं हो सकती. कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी आस्था के मुताबिक जीवन जीने की आजादी है, बशर्ते उससे सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो. लेकिन आश्रम में रहने वाले लोगों और वहां चल रही गतिविधियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. अगर कोई जिम्मेदारी लेने के लिए आगे नहीं आता है तो राज्य को इस मामले में कदम उठाना होगा.
आश्रम के पैसों का हिसाब भी जांचे जाने पर सवाल
महिला के वकील ने आरोप लगाया कि आश्रम में रहने वाली कुछ महिलाओं को कथित तौर पर नशीली दवाएं दी जाती थीं और वे अपनी मर्जी से फैसला लेने की स्थिति में नहीं थीं. कुछ नाबालिग लड़कियों के आश्रम में रहने का दावा भी किया गया. इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर आश्रम में नाबालिग बच्चे हैं तो क्या उन्हें वहां के लोगों के भरोसे छोड़ा जा सकता है. कोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि सामने आए तथ्य बेहद गंभीर और चौंकाने वाले हैं.
कोर्ट ने आश्रम की आर्थिक गतिविधियों पर भी सवाल उठाए. कोर्ट ने पूछा कि आश्रम में इतना पैसा कहां से आ रहा है और उसके खातों की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने आयकर विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि विभाग आश्रम के खातों की जांच क्यों नहीं कर सकता.
2017 से चल रहा है पूरा मामला
यह मामला नया नहीं है। साल 2017 में एनजीओ फाउंडेशन फॉर सोशल एम्पावरमेंट ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि रोहिणी स्थित आध्यात्मिक विश्व विद्यालय में कई नाबालिग लड़कियों और महिलाओं को कथित तौर पर अवैध तरीके से रखा जा रहा है और उन्हें अपने माता-पिता से मिलने नहीं दिया जाता. इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को वीरेंद्र देव दीक्षित का पता लगाने और आश्रम में महिलाओं व लड़कियों को कथित तौर पर बंधक बनाए जाने के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया था. सीबीआई ने उसकी तलाश में आश्रम और फार्महाउसों पर छापेमारी भी की थी और गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें बनाई थीं.
31 अगस्त को फिर होगी सुनवाई
कोर्ट इस मामले में पहले ही वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ लगे दुष्कर्म के गंभीर आरोपों का जिक्र कर चुका था. सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि उसके खिलाफ दुष्कर्म के आरोपों से जुड़े दो एफआईआर दर्ज हैं और उसे पकड़ने के लिए लगातार प्रयास किए गए थे. अब दीक्षित की मौत की जानकारी सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने आश्रम की मौजूदा व्यवस्था और वहां रहने वाले लोगों की स्थिति पर नए सिरे से सवाल उठाए हैं.
हाईकोर्ट ने विजय विहार थाना एसएचओ को लापता महिला का पता लगाने के साथ पूरे मामले की जांच करने का आदेश दिया है. पुलिस को 31 अगस्त को कोर्ट को जांच की स्थिति और नतीजे से अवगत कराना होगा. कोर्ट की नजर अब इस बात पर भी है कि आश्रम का संचालन कौन कर रहा है और वहां रहने वाली महिलाओं व लड़कियों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है.
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