दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार (25 अगस्त) को क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत को बड़ी राहत दी है. कोर्ट का कहना है कि वह कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र हैं. शेखावत ने आरोप लगाया था कि उन्हें नेब सराय स्थित एक मकान में नजरबंद रखा गया है. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अदालत के सामने स्पष्ट किया कि उन्हें न तो गिरफ्तार किया गया है और न ही किसी तरह की हिरासत में रखा गया है.
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आया आदेश
हाई कोर्ट का यह आदेश राज शेखावत को अदालत के समक्ष पेश करने के अनुरोध वाली एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आया. याचिका में कहा गया था कि उन्हें यहां नेब सराय इलाके में एक मकान में कथित तौर पर नजरबंद रखा गया है.
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘जहां तक हिरासत के आरोप का सवाल है, दिल्ली पुलिस के वकील के इस बयान को देखते हुए कि याचिकाकर्ता को हिरासत में नहीं रखा गया है, इस मामले में तत्काल कोई और राहत देने की जरूरत नहीं है.’’
वकीलों ने किया नजरबंदी का दावा
याचिकाकर्ता के वकीलों ने दावा किया कि संबंधित प्राधिकारियों ने शेखावत को 24 अगस्त से परिसर से बाहर नहीं जाने दिया है. उनके वकील ने कहा कि राज शेखावत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी) विनियम, 2026 के संबंध में देशव्यापी जागरूकता अभियान चला रहे हैं.
दिल्ली पुलिस ने अदालत को क्या बताया?
दिल्ली पुलिस के वकील ने अदालत को बताया कि राज शेखावत को किसी भी मामले में गिरफ्तार नहीं किया गया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि आशंका है कि शेखावत प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर की ओर जा सकते हैं. अदालत ने दिल्ली पुलिस के बयान को स्वीकार करते हुए कहा कि ‘‘याचिकाकर्ता कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र है.’’
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