फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। स्वतंत्रता दिवस नजदीक आते ही शहर में पतंगबाजी का उत्साह बढ़ने लगा है, लेकिन इसके साथ ही प्रतिबंधित और जानलेवा मांझे का खतरा भी बढ़ गया है। शहर के कई बाजारों में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में 15 अगस्त से पहले इसकी बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रशासन और पुलिस की ओर से व्यापक अभियान चलाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

जिला प्रशासन की ओर से प्रतिबंधित मांझे और नायलोन से बने सिंथेटिक धागे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर पहले से ही प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद बाजारों में इसकी बिक्री की शिकायतें सामने आना प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है। स्वतंत्रता दिवस के दौरान पतंगबाजी बढ़ने के कारण इस तरह के मांझे से हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है।
पिछले वर्ष जुलाई में मांझे की चपेट में आने से करीब 20 लोग घायल हुए थे। घायलों में डॉक्टर और पुलिसकर्मी भी शामिल थे। 28 जुलाई को दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे के पलवल एलिवेटेड मार्ग पर मांझे से बचने के प्रयास में एक ऑटो पलट गया था। इस हादसे में फरीदाबाद की जवाहर कॉलोनी निवासी एक युवक की मौत हो गई थी।
पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के बाद भी प्रतिबंधित मांझे से गंभीर हादसा सामने आया था। 16 अगस्त को सेक्टर-62 के पास बाइक से जा रहे 36 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर जवाहर की गर्दन मांझे की चपेट में आ गई थी। गंभीर हालत में उन्हें निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। मांझे को हाथ से हटाने के प्रयास में उनकी अंगुलियां भी कट गई थीं।
अगस्त 2025 में सीएम फ्लाइंग ने बल्लभगढ़ में पतंग की दुकानों पर छापेमारी कर प्रतिबंधित चीनी मांझा बरामद किया था। इस मामले में तीन दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। हालांकि इस बार 15 अगस्त नजदीक आने के बावजूद अभी तक इस तरह की कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। प्रतिबंधित मांझा केवल वाहन चालकों और राहगीरों के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि इससे पक्षियों के जीवन पर भी गंभीर खतरा मंडराता है।
स्वतंत्रता दिवस के दौरान पतंगबाजी बढ़ने की संभावना को देखते हुए शहर के प्रमुख बाजारों में विशेष जांच अभियान चलाने, पतंग और मांझा बेचने वाली दुकानों के स्टॉक की जांच करने तथा प्रतिबंधित मांझे की बिक्री मिलने पर सख्त कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। प्रशासन के रिकॉर्ड में प्रतिबंध पहले से मौजूद है, अब देखना यह होगा कि 15 अगस्त से पहले प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
