फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में 5वें राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस कार्यक्रम का आयोजन सेफ्टी एंड क्वालिटी फोरम, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के फरीदाबाद लोकल सेंटर और विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।

इस वर्ष सम्मेलन की थीम “भारत के लिए नेक्स्ट-जन क्वालिटी सिस्टम: डिजिटल, ग्रीन एवं मानव-केंद्रित इंजीनियरिंग द्वारा राष्ट्रीय उत्कृष्टता” रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य नवाचार, सतत विकास और मानव-केंद्रित तकनीकों के माध्यम से भविष्य की गुणवत्ता प्रणालियों को बढ़ावा देना है। स्वागत संबोधन में इंजी. इंदरदीप सिंह ओबरॉय ने कहा कि गुणवत्ता को केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है।
सम्मेलन संयोजक प्रो. प्रदीप कुमार डिमरी ने बुद्धिमान और सतत गुणवत्ता प्रणालियों की जरूरत पर बल दिया, वहीं प्रो. मुनीश वशिष्ठ ने विश्वविद्यालय की अनुसंधान और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। एसक्यूएफ के चेयरमैन देवेंद्र गिल ने निरंतर सुधार और नवाचार को महत्वपूर्ण बताया। आईईआई के सचिव एवं महानिदेशक मेजर जनरल एम.जे.एस. सयाली (सेवानिवृत्त) ने इंजीनियरिंग संस्थानों से गुणवत्ता सुधार में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन में आईईआई के अध्यक्ष इंजी. मनीष एम. कोठारी ने उभरती तकनीकों और सतत प्रक्रियाओं को अपनाकर भारत को वैश्विक गुणवत्ता मानकों में अग्रणी बनाने की बात कही।इस मौके पर सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन किया गया और चार क्वालिटी एक्सीलेंस अवार्ड भी प्रदान किए गए। साथ ही विभिन्न प्रायोजकों को सम्मानित किया गया।
सम्मेलन को व्यापक शैक्षणिक प्रतिसाद मिला है इसमें करीब 70 शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 28 को तकनीकी सत्रों के लिए चुना गया। देश और विदेश के विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही 12 घंटे का हैकाथॉन भी आयोजित किया जा रहा है, जिसमें छात्र नवाचार आधारित समस्याओं के समाधान पर काम कर रहे हैं।