फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। बाटा फ्लाईओवर पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र की मौत के मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने करीब चार साल बाद मृतक के माता-पिता को 89 लाख 4 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही इस राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दुर्घटना लापरवाही से सड़क के बीच खड़ी की गई क्रेन के कारण हुई थी। बिना किसी चेतावनी संकेत, लाइट या इंडिकेटर के खड़ी इस क्रेन ने एक होनहार छात्र की जान ले ली, जिसका भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा था। याचिका के अनुसार, 4 अप्रैल 2022 की रात गौरव अपने भाई रवि कुमार के साथ एसएसबी अस्पताल की ओर जा रहे थे। जब वे रात करीब 10 बजे बाटा फ्लाईओवर पर पहुंचे, तो अंधेरे में सड़क के बीच खड़ी एक क्रेन से उनकी बाइक टकरा गई। हादसा इतना गंभीर था कि गौरव को सिर समेत कई जगह गहरी चोटें आईं।
उन्हें तुरंत बादशाह खान नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जांच में सामने आया कि क्रेन चालक ने वाहन को लापरवाही से बीच सड़क पर खड़ा किया था और सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया था। पुलिस ने इस मामले में चालक के खिलाफ केस दर्ज कर चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि गौरव अविवाहित थे और मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के करीब थे। ऐसे में उनकी संभावित आय 70 हजार रुपये प्रतिमाह आंकी गई। भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि तय की गई।
अधिकरण ने आदेश दिया कि बीमित क्रेन के कारण मुआवजे की पूरी राशि बीमा कंपनी जमा करेगी, जिसे बाद में मृतक के माता-पिता मिथलेश और सत्यप्रकाश को बराबर हिस्सों में दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा में सड़क हादसों का एक बड़ा कारण गलत तरीके से खड़े वाहन हैं। खासकर हाईवे और फ्लाईओवर पर बिना रिफ्लेक्टर, पार्किंग लाइट या चेतावनी संकेत के खड़े वाहन रात के समय गंभीर खतरा पैदा करते हैं।