फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। मानसून की दस्तक के साथ ही जहां किसानों के चेहरे खिलते थे, वहीं हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गांवों में तनाव पसर जाता था। यमुना की बदलती धारा के साथ जमीन के मालिकाना हक को लेकर होने वाली जंग अब इतिहास बनने जा रही है। दोनों राज्यों के लोक निर्माण विभाग (PWD) ने आपसी सहमति से सीमा पर 300 विशेष सीमेंटेड पिलर लगाने का कार्य लगभग पूरा कर लिया है।

दरअसल, यमुना नदी के जलस्तर में मानसून के दौरान तेजी से बढ़ोतरी होती है, जिससे इसकी धारा कई बार अपना रुख बदल लेती है। यही बदलाव हर साल हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच जमीन को लेकर भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा करता रहा है। किसानों के बीच खेतों की सीमाओं को लेकर तनाव, झगड़े और कई बार हिंसक घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए अब ठोस कदम उठाया गया है। दोनों राज्यों की सहमति से सीमा पर मजबूत सीमेंटेड पिलर लगाए जा रहे हैं, जिनकी कुल संख्या 300 है। इनमें से अधिकांश पिलर लगाए जा चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर नदी के अधिक जलस्तर के कारण काम अभी शेष है। इन पिलरों को लगभग 70 फुट ऊंचाई तक बनाया जा रहा है, ताकि दूर से ही स्पष्ट रूप से सीमा की पहचान हो सके।
पिलरों की डिजाइन इस तरह तैयार की गई है कि वे तेज बहाव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों में भी स्थिर रह सकें। इनका आधार जमीन के करीब 50 फुट नीचे तक मजबूत किया जा रहा है, जिससे पानी का दबाव भी इन्हें प्रभावित न कर सके। इतिहास पर नजर डालें तो करीब चार दशक पहले भी इसी तरह सीमा निर्धारण के लिए पिलर लगाए गए थे, लेकिन समय के साथ वे नदी के बहाव में बह गए।
इसके बाद से हर साल सीमांकन को लेकर विवाद गहराता गया। कई बार राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश भी की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। इसी समस्या के समाधान के लिए सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर अब नए पिलर स्थापित किए जा रहे हैं। फरीदाबाद क्षेत्र में यमुना करीब 25 किलोमीटर तक बहती है।
यमुना के किनारे दोनों राज्यों के 50 से अधिक गांव बसे हुए हैं, जहां यह विवाद सबसे ज्यादा देखने को मिलता था। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में दोनों राज्यों की बराबर भागीदारी रही है। लगभग 150 पिलर उत्तर प्रदेश की ओर से लगाए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस संयुक्त प्रयास के बाद अब सीमा को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं रहेगा और वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।
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