चंडीगढ़, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने हरियाणा से राज्यसभा चुनाव के लिए कर्मवीर सिंह बौद्ध को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी का यह फैसला सामाजिक संतुलन और दलित प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कर्मवीर सिंह बौद्ध को कुमारी शैलजा का समर्थक माना जाता है।
कर्मवीर सिंह बौद्ध मूल रूप से अंबाला क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और लंबे समय तक हरियाणा सरकार के प्रशासनिक तंत्र में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने हरियाणा सिविल सचिवालय में सुपरिंटेंडेंट के पद पर सेवाएं दीं और कुछ वर्ष पहले सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए। प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें सरकारी नीतियों और व्यवस्था की अच्छी समझ रखने वाला माना जाता है।
सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में सक्रिय
सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद कर्मवीर सिंह बौद्ध ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस के साथ जुड़कर संगठनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान वे मुलाना विधानसभा सीट से टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे, हालांकि उस समय पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था। इसके बावजूद वे संगठन में सक्रिय रहे।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए कर्मवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाकर दलित समुदाय को प्रतिनिधित्व देने और सामाजिक समीकरण मजबूत करने का संदेश देने की कोशिश की है। हरियाणा विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या को देखते हुए राज्यसभा की दो सीटों में से एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना मानी जा रही है। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में कर्मवीर सिंह बौद्ध की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
संसद में हरियाणा के मुद्दे उठाने की उम्मीद
यदि कर्मवीर सिंह बौद्ध राज्यसभा पहुंचते हैं तो उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे हरियाणा से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाएंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि प्रशासनिक पृष्ठभूमि होने के कारण वे नीति और शासन से जुड़े विषयों पर प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर हरियाणा की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद के उच्च सदन में पहुंचकर कर्मवीर सिंह बौद्ध किस तरह अपनी भूमिका निभाते हैं।