सूरीनाम में रहने वाला भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है: राष्ट्रपति मुर्मु

नई दिल्ली, (प्राइम न्यूज़ ब्यूरो)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी के साथ सूरीनाम में भारतीय लोगों के आगमन के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पारामारिबो में आयोजित सांस्कृतिक समारोह में शामिल हुईं। पारामारिबो के इंडिपेंडेंस स्क्वायर में सभा को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि आज हम सूरीनाम में भारतीय लोगों के आगमन की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, जो सूरीनाम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

गौर तलब है की आज ही के दिन, वर्ष 1873 में, भारतीय लोगों का पहला समूह लल्ला रूख नाम के जहाज पर सवार होकर सूरीनाम के तट पर पहुंचा था, जो कि इस देश के इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत थी। राष्ट्रपति ने कहा कि एक बहुसांस्कृतिक समाज और अवसरों की एक भूमि के रूप में, सूरीनाम ने वहां आकर बसने वाले सभी विविध समुदायों का स्वागत किया है। इन वर्षों के दौरान, विविध समुदायों के लोग एक परिवार और एक देश के रूप में उभरे।

उन्होंने एकता और समावेशिता के प्रति समर्पण एवं प्रतिबद्धता के लिए सूरीनाम के लोगों की सराहना की। राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि व्यापक भौगोलिक दूरियों, विभिन्न समय क्षेत्रों और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद, भारतीय प्रवासी हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 150 वर्षों में, भारतीय समुदाय न केवल सूरीनाम के समाज का एक अभिन्न अंग बन गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि एक ऐसे समय में जब सूरीनाम अपने पूर्वजों की विरासत और भारत के साथ अपने संबंधों का उत्सव मना रहा है, भारत एकजुटता और आदर के साथ सूरीनाम के साथ खड़ा है। उन्होंने ओसीआई कार्ड के लिए पात्रता संबंधी मानदंड का विस्तार भारतीय क्षेत्रों से सूरीनाम आए मूल भारतीय प्रवासियों की चौथी पीढ़ी से आगे जाकर छठी पीढ़ी तक करने के भारत सरकार के निर्णय की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि इस ओसीआई कार्ड को भारत के साथ उनके 150 साल पुराने रिश्ते की एक अहम कड़ी के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों से भारत के साथ अपने संबंधों को बनाए रखने की दिशा में प्रयास जारी रखने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि सूरीनाम और भारत दोनों ने औपनिवेशिक शासन की लंबी अवधि के बाद अपनी अर्थव्यवस्थाओं और सामाजिक व्यवस्थाओं के पुनर्निर्माण की दिशा में अथक प्रयास किए हैं।

इससे पहले दिन में, राष्ट्रपति ने बाबा और माई स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो सूरीनाम की धरती पर पहली बार कदम रखने वाले पहले भारतीय पुरुष और महिला का प्रतीकात्मक चित्रण है। इसके बाद, उन्होंने मामा स्रानन स्मारक पर अपना सम्मान प्रकट किया। यह स्मारक मामा स्रानन, अपने पांच बच्चों (सूरीनाम में देखभाल और स्नेह के साथ निवास करने वाली पांच प्रजातियों) को धारण करने वाली सूरीनाम माता का प्रतीक है।

प्रेसिडेंशियल पैलेस में आयोजित एक समारोह में, राष्ट्रपति मुर्मु को सूरीनाम के राष्ट्रपति द्वारा सूरीनाम के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड ऑर्डर ऑफ द चेन ऑफ द येलो स्टार’ से सम्मानित किया गया। अपनी स्वीकृति संबोधन में, राष्ट्रपति ने उन्हें यह सम्मान प्रदान करने के लिए राष्ट्रपति संतोखी और सूरीनाम सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल उनके लिए बल्कि भारत के 1.4 अरब से अधिक लोगों के लिए भी बेहद महत्व रखता है।

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Author: Prime Haryana

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