भारत भूमि के कण कण में बसे हैं भगवान राम: सुरेंद्र शर्मा बबली

फरीदाबाद, (सरूप सिंह)। रामनवमी के अवसर पर बल्लबगढ़ में भव्य श्रीराम जन्मोत्सव शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस मोके पर पुरे शहर में शोभा यात्रा को घुमाया गया, शोभा यात्रा में शहर के लोगों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। शोभा यात्रा में मुख्यअथि के तौर पर पहुंचे अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा के रष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा बबली ने कहा की श्रीराम सिर्फ भारत के है नहीं है बल्कि समूचे विश्व में इनको पूजा जाता है।

बबली ने बताया की हर साल चैत्र नवरात्रि का समापन रामनवमी पर होता है, धर्मशास्त्रों के अनुसार रामनवमी पर श्रीराम का अवतरण भारत की भूमि पर हुआ था। भगवान राम के जन्म की इस तारीख का जिक्र रामायण और रामचरित मानस जैसे तमाम धर्मग्रंथों में किया गया है। श्री राम स्वयं भगवान विष्णु का सातवां अवतार थे। आज देश में रामनवमी का त्योहार धूमधाम से मनाया गया।

बबली ने कहा की भारत भूमि के कण कण में भगवान राम बसे हुए हैं। उनके बिना भारत की कल्पना करना बेमानी है, सारा भारत राम को अपना आराध्य और पूजनीय मानता है। लेकिन भगवान राम को सिर्फ भारत तक सीमित करना उचित नहीं होगा, क्योंकि भारत के बाहर भी श्रीराम की पूजा की जाती है। जैसे थाईलैंड बौद्ध देश हैं पर वहां भी राम आराध्य हैं।

थाईलैंड में बौद्ध मंदिरों में आपको ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियां और चित्र भी मिल जाएंगे। थाईलैंड का राष्ट्रीय ग्रन्थ रामायण है। वैसे थाईलैंड में थेरावाद बौद्ध के मानने वाले बहुमत में हैं, फिर भी वहां का राष्ट्रीय ग्रन्थ रामायण है। जिसे थाई भाषा में “ राम-कियेन“ कहते हैं l जिसका अर्थ राम-कीर्ति होता है, जो वाल्मीकि रामायण पर आधारित है l पूरा विश्व राम को आदर्श पुरुष मानता है।

थाईलैंड में राजा को राम ही कहा जाता है। उसके नाम के साथ अनिवार्य रूप से राम लगता है। राज परिवार अयोध्या नामक शहर में रहता हैl ये स्थान बैंकॉक से 50-60 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा इस्लामिक देश इंडोनेशिया की संस्कृति पर रामायण की गहरी छाप है। इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप का नामकरण सुमित्रा के नाम पर हुआ था। इंडोनेशिया के जावा शहर की एक नदी का नाम सरयू है। इंडोनेशिया की रामलीला के बारे में अक्सर लिखा जाता है।

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Author: Prime Haryana

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